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अरुणाचल प्रदेश में मेगा डैम के विरोध में उठती आवाज़ें, मानवाधिकार कार्यकर्ता ईबो मिली पर मामला दर्ज

अरुणाचल प्रदेश में मेगा डैम के विरोध में उठती आवाज़ें, मानवाधिकार कार्यकर्ता ईबो मिली पर मामला दर्ज

देश के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (Siyang Upper Multipurpose Project – SUMP) को लेकर स्थानीय समुदायों, पर्यावरणविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से तीव्र विरोध सामने आ रहा...

देश के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में प्रस्तावित 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (Siyang Upper Multipurpose Project – SUMP) को लेकर स्थानीय समुदायों, पर्यावरणविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से तीव्र विरोध सामने आ रहा है।

यह परियोजना सियांग नदी पर गेकू के पास बनाई जानी है, जिसका उद्देश्य बिजली उत्पादन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन है। सरकार का दावा है कि यह पूर्वोत्तर को ऊर्जा-समृद्ध बनाएगी, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और अधोसंरचना का विकास होगा।

परियोजना से जुड़े केन्द्रीय जल आयोग (CWC) के वरिष्ठ अभियंता आर. के. खन्ना का कहना है:“यह परियोजना तकनीकी रूप से सुरक्षित है और विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही आगे बढ़ाई जा रही है। स्थानीय पुनर्वास नीति को यथासंभव न्यायसंगत और प्रभावी बनाया गया है।”

वहीं, पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन कर रही स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के सदस्य, प्रसिद्ध पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सीमा शर्मा (IIT गुवाहाटी) और पारिस्थितिकीविद् प्रो. दिनेश बोरा (नेफ़ा इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायर्नमेंटल स्टडीज़, ईटानगर) ने भी अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कहा है: सियांग बेसिन की पारिस्थितिकी संवेदनशील अवश्य है, लेकिन यदि निर्माण से पहले सख़्त निगरानी, पुनर्वास और मुआवज़े की नीति अपनाई जाए और जल स्तर नियंत्रण प्रणाली स्थापित की जाए, तो दीर्घकालिक लाभ अधिक होंगे।”

उनका तर्क है कि जलविद्युत उत्पादन कार्बन मुक्त, नवीकरणीय और टिकाऊ ऊर्जा का स्रोत है, और अरुणाचल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में इसकी संभावनाओं का उपयोग पर्यावरणीय रूप से ज़िम्मेदार तरीकों से किया जा सकता है।

विस्थापन और पर्यावरणीय चिंताएं

हालांकि, बेगिंग, गेकू, यिंगकियोंग और बोलेंग जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोग इस परियोजना को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानते हैं। उनका कहना है कि यह डैम सैकड़ों गाँवों को जलमग्न कर देगा, हज़ारों लोग अपनी ज़मीन, घर और पारंपरिक जीवनशैली से वंचित हो जाएंगे। साथ ही इससे स्थानीय पारिस्थितिकी, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति होगी।

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विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई

इस विरोध की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार अधिवक्ता ईबो मिली पर सियांग ज़िले के उपायुक्त पीएन थुंगोन ने 23 मई को निषेधाज्ञा उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति क्षति के आरोप में मामला दर्ज कराया है। मिली पर आरोप है कि उन्होंने 23 मई 2025 को सैकड़ों ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन करके प्रशासन की निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया। उन पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ईबो मिली अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र से संबंध रखते हैं और “Siang Indigenous Farmers’ Forum” के ज़रिए आदिवासी किसानों, पर्यावरण और मानवाधिकारों के लिए दशकों से सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न मंचों पर भूमि अधिकार, पारंपरिक आजीविका और आदिवासी स्वायत्तता जैसे मुद्दों को उठाया है।

उन्होंने अरुणाचल में बिना जनसहमति और पारदर्शिता के थोपे गए मेगा प्रोजेक्ट्स का बार-बार विरोध किया है। मिली का मानना है कि इन परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की सहमति और पर्यावरणीय आकलन को नज़रअंदाज़ किया जाता है। वे कहते हैं कि “विकास ऐसा हो जो प्रकृति और समुदाय—दोनों का सम्मान करे।”

मिली ने इससे पहले भी राज्य में ज़बरन भूमि अधिग्रहण, पुलिस उत्पीड़न और शिक्षा-संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के मामलों में मानवाधिकार हनन के खिलाफ जनहित याचिकाएँ दायर की हैं। वे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी अधिकारों की मज़बूती के लिए कार्य कर चुके हैं।

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