मानवाधिकार कार्यकर्ता ईबो मिली ‘लापता’, गिरफ्तारी की आशंका पर सिविल सोसायटी ने उठाए सवाल

28 मई 2025,  सियांग (अरुणाचल प्रदेश)। 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (SUMP) के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार पैरोकार ईबो मिली के अचानक ‘लापता’ होने को लेकर उनके परिजन और सहयोगी गंभीर चिंता जता रहे हैं।

ईबो मिली के अनाधिकारिक रूप से हिरासत में लिए जाने की आशंका गहराई है, तो राज्य भर की सिविल सोसायटी संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने राज्य सरकार से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

बताया गया है कि बोलेंग पुलिस थाना में दर्ज एफआईआर के ठीक एक दिन बाद (26 मई शाम) से मिली का कोई अता-पता नहीं है। उनका फोन बंद है और परिजनों को उनकी लोकेशन या स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी गई है।

एफआईआर सियांग जिले के उपायुक्त पीएन थुंगोन द्वारा सोमवार को दर्ज कराई गई थी, जिसमें ईबो मिली पर 22 और 23 मई को बेगिंग गांव में धारा 144 के उल्लंघन और बिना अनुमति के जनसभा आयोजित करने का आरोप लगाया गया है।

आरोप है कि ईबो मिली ने Siang Indigenous Farmers’ Forum (SIFF) के बैनर तले करीब 400 ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन किया, जबकि इससे एक दिन पहले ही ज़िला प्रशासन ने क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की थी।

प्रशासन की शिकायत में कहा गया है कि“22/05/2025 को बेगिंग में ईबो मिली ने 80–90 लोगों के साथ डैम स्थल पर प्रदर्शन किया। अगले दिन यानी 23 मई को SIFF के बैनर तले लगभग 400 लोग एकत्र हुए, जिससे 22 मई को जारी निषेधाज्ञा (क्रमांक: SD/JUD-11(2)2022-23/VOL-1/532-05) का स्पष्ट उल्लंघन हुआ।”

See also  संरक्षित जंगलों में असुरक्षित आदिवासी

शिकायत में पुलिस अधिकारियों से “कानून के उपयुक्त प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई” करने को भी कहा गया है।

इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में पहले से ही असंतोष है। सरकारी तकनीकी दलों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती ने स्थिति को और भड़का दिया है।

सियांग और अपर सियांग जिलों के ग्रामीणों ने अपनी पारंपरिक ज़मीन, संस्कृति और नदी तंत्र को होने वाले अपूरणीय नुकसान पर गहरी चिंता जताई है।

ईबो मिली इससे पहले भी दो बार पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों के मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध के चलते हिरासत में लिए जा चुके हैं। वे लंबे समय से राज्य में बिना जनसहमति के लाई जा रही मेगा परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं।

Table of Contents

नीले धुएँ की धरती : ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’

समाज और सरकार चाहे तो पर्यावरण को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण अमरीका के टेनेसी और नार्थ कैरोलीना राज्यों की सीमाओं से लगा ‘ग्रेट स्मोकी माउंटेन्स’ है। करीब सौ साल पहले कानून बनाकर प्रकृति को उसके

Read More »

पर्यावरण संरक्षण : केवल पौधारोपण नहीं, जीवनशैली में बदलाव भी जरूरी

विश्व पर्यावरण दिवस केवल पौधे लगाने का संदेश नहीं देता, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने का आह्वान करता है। जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, जैविक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपभोग जैसे छोटे-छोटे प्रयास

Read More »

World Environment Day : पर्यावरण संरक्षण पर टिका है भविष्य

पर्यावरण संरक्षण और संतुलन का प्रश्न आज पूरी मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित

Read More »