Latest post

अमेरिका के बिना कैसे काबू होगा, जलवायु परिवर्तन ?

दुनियाभर के बाजारों और उनकी मार्फत वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने वाले ‘ग्रूप-20’ के देश भी अब जलवायु परिवर्तन के प्रलयंकारी प्रभावों की चपेट में आते जा रहे हैं, लेकिन उनका सरगना अमेरीका अपने मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद…

पर्यावरणीय आपातकाल-जीवन के लिए खतरे की घंटी!

यह पर्यावरण की बजाए खुद को बचाने का दौर है। इंसानी बिरादरी ने अपने धतकरमों की मार्फत समूचे सचराचर जगत को जिन हालातों में ला पटका है, उससे कोई उम्मीद तो दिखाई नहीं देती, लेकिन फिर भी चंद समझदारों के…

जैव विविधता दिवस : जैव विविधता पर संकट ?

22 मई जैव विविधता दिवस पर विशेष वैश्विक स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण एक चुनौती के रूप में सामने है। दुनियाभर में प्राकृतिक आवासों की क्षति, वन विनाश, खनिज कार्य, कृषि विकास, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक महत्व की फसलों…

प्रकृति का प्रसाद ही नहीं, राजनीति का जरिया भी है, पानी

पानी को सिर्फ प्रकृति का प्रसाद मानने वाले नादान लोगों को यह जानकारी भौंचक कर सकती है कि मध्यप्रदेश की बे-पानी होती आबादी को ठेंगे पर मारते हुए गुजरात को उदारतापूर्वक पानी दिया जा रहा है। वैसे भी ‘नर्मदा पंचाट’…

प्रकृति का प्रसाद ही नहीं, राजनीति का जरिया भी है, पानी

पानी को सिर्फ प्रकृति का प्रसाद मानने वाले नादान लोगों को यह जानकारी भौंचक कर सकती है कि एन लोकसभा चुनाव की बेला में मध्यप्रदेश की बे-पानी होती आबादी को ठेंगे पर मारते हुए गुजरात को उदारतापूर्वक पानी दिया जा…

मेरी किसानी का सफर

गांधी विचार को लेकर बरसों-बरस होशंगाबाद के निटाया गांव में सक्रिय रहे स्व. श्री बनवारीलाल चैधरी के अनेक अनूठे प्रयासों में से एक था-अपने युवा कार्यकर्ताओं की ‘पीठ ठौंकने’ के दर्जे का सम्मान करना। हर साल सामाजिक कार्यों में लगे…

युद्ध की बजाए अहिंसा से ही संभव है, शांति और न्याय

दुनियाभर की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं तक में राजसत्ता की ताकत को आमतौर पर हिंसक क्षमताओं, युद्धों में जीतने की सतत सैनिक तैयारी और उनके लिए साल-दर-साल बढ़ते वार्षिक बजट से ही मापा जाता है। लेकिन क्या इस उन्मादी अभियान से हम…

जयप्रकाश के साथ होना

जयप्रकाश नारायण जन्मदिन : 11 अक्‍टूबर हमारे देश में सत्तर का दशक भारी उथल-पुथल का रहा है। इन्हीं दस सालों में नक्सलवाद पनपा, बांग्लदेश की लड़ाई हुई, बिहार में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ और गुजरात में ‘नवनिर्माण’ आंदोलन खड़े हुए, पहली बार…

पर्यावरण पर किया जाता प्रहार भी हिंसा ही है

जल, जंगल, जमीन, हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को भरपूर मुनाफे के लिए बेरहमी से लूटना, दुहना एक तरह की हिंसा ही है। यह हिंसा धीरे-धीरे समाज में जगह बनाती है और फिर इंसानों के बीच अपने क्रूरतम रूप में अवतरित…

लोकसत्ता कहीं गहरा अन्याय कर बैठे तो सत्याग्रह ही रास्ता है

11 सितंबर : विनोबा जयंती पर विशेष आज साम्प्रदायिक विद्वेष और उससे उत्पन्न हिंसा देश की सर्वाधिक गंभीर समस्या है। मंदिर-मस्जिद विवाद या ऐसे अन्य मसलों से साम्प्रदायिकता पैदा नहीं होती बल्कि साम्प्रदायिक भावना के कारण ये मसले पैदा होते…