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स्वास्थ्य अधिकार कानून; राजस्‍थान विधानसभा सत्र में पारित किये जाने की मांग

जयपुर । लम्बे समय से राजस्थान सरकार स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाने में अटकी हुई है। निजी अस्पतालों अपने आप को किसी भी कानून से मुक्त होकर किसी भी प्रकार के रेगुलेशन से मुक्त होकर कार्य करना चाह रही है। अब…

पर्यावरण को सहेजने में भारतीय ज्ञान परंपरा सक्षम : कुलपति प्रो. रेणु जैन

पर्यावरण के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट सेवाएं देने वाले वरिष्‍ठजनों का सम्‍मान इंदौर 23 फरवरी । आज पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में अनेक उपाय किए जा रहे हैं। विकास की अवधारणा को फिर से परिभाषित किया जा रहा है।…

विचार : समाज से पहचान के लिए पदयात्रा

पिछले महीने समाप्त हुई राहुल गांधी की ‘कन्याकुमारी से कश्मीर’ की पदयात्रा के कई निहितार्थ हैं और ये निहितार्थ मंहगाई, बेरोजगारी, पूंजी के केंद्रीकरण, भय, कट्टरता और नफरत की राजनीति के खिलाफ कहे गए घोषित उद्देश्यों के अलावा हैं। क्या…

रामनगरी ओरछा : अविरल बहती बापू की विचारधारा

प्रतिभा चतुर्वेदी पुण्यभूमि राम नगरी भगवान राम के कारण जानी जाती है तो वही उसी धरती पर प्रवाहित पवित्र नदी बेतवा के कंचन-घाट को बापू के अस्थि-विसर्जन के लिए भी जाना जाता है। 12 फरवरी सन 1948 को गांधीजी की अस्थियों का विसर्जन देश के विभिन्न…

खस्ताहाल खादी : अस्तित्व की लड़ाई

खादी, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक सर्वमान्य प्रतीक है, सरकारी नीतियों के चलते क्या अपने मूल स्वरूप में बच पाएगी? क्या सर्वग्राही बाजार और आधुनिक फैशन उसे भी धीरे-धीरे ‘सिन्थेटिक’ वस्त्रों की जमात में शामिल नहीं कर देंगे? बर्लिन…

वर्ष 2023 का निवानो शांति पुरस्कार प्रख्यात गांधीवादी राजगोपाल पी.व्ही. को दिये जाने की घोषणा

टोक्यो में 11 मई 2023 को दिया जायेगा पुरस्‍कार प्रख्यात गांधीवादी, सर्वोदयी नेता एवं एकता परिषद के संस्थापक और श्री राजगोपाल पी.व्ही. को न्याय और शांति की सेवा में उनके असाधारण कार्य के लिए दुनिया की प्रतिष्ठित संस्था निवानों पीस…

हम चट्टानों की तरह मौन हो गये है, जहाँ सत्य की आवाज लौटकर नहीं आती

इंदौर, 16 फरवरी। देश के वरिष्ठ पत्रकार व चिंतक श्रवण गर्ग ने कहा कि अब हमने बोलना बंद कर दिया है, चुप रहना अपनी आदत बना चुके है। तीर्थस्थलों पर अब पालकी और बैसाखियां बढ़ती जा रही है। वे नहीं…

खेती किसानी : क्या सचमुच मिलेट के दिन फिरेंगे ?

मिलेट जैसे ज्वार बाजरा आदि के दाने बहुत छोटे आकार के होते है। इसके उलट अनाज मसलन गेहूं, चावल, मक्का आदि के दाने बड़े आकार के होते है। दोनों में यह मूलभूत अंतर है। मिलेट को फिर से मुख्य धारा…

‘यंगशाला कल्चरल वॉक’ : विभिन्न धर्मों की समझ विकसित करने की पहल

भोपाल में युवाओं के एक लोकप्रिय ‘अड्डे’ की हैसियत पा चुकी ‘यंगशाला’ उनमें विभिन्न धर्मों की समझ विकसित करने की जरूरी पहल कर रही है। इसमें युवाओं को तरह-तरह के धार्मिक स्थलों की यात्रा के अलावा, संभव हो तो उन…