Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

ताजा आलेख

दो हजार की नोट वापसी : आरबीआई की साख पर सवाल

दो हजार रुपए के नोटों की वापसी को सरकार और ‘आरबीआई’ यूं तो ‘क्लीन नोट’ यानि चार-पांच साल चल चुके कटे-फटे–गले नोटों को बदलने की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं, लेकिन जिस तरह से इसे किया गया उसने ‘आरबीआई’ की…

परिवहन : गायब होती गाड़ियां

कंडम मानकर रद्द की जाने वाली दिल्ली की गाड़ियों को देखें तो पर्यावरण का संरक्षण सीधा परिवहन के विरोध में खड़ा दिखाई देता है। दस साल पुरानी डीजल और पन्द्रह साल पुरानी पैट्रोल गाड़ियों के खारिज कर देने से कार…

क्या यूपी में 2024 की तैयारियाँ प्रारंभ हो गईं हैं ?

यूपी में जो कुछ भी चल रहा है क्या उसे 2024 की तैयारियों के साथ जोड़कर भी देखा जा सकता है ? अगर ऐसा ही है तो आने वाले दिनों में और भी काफ़ी कुछ देखने-समझने की तैयारी रखना चाहिए…

Rahul Gandhi राहुल बेघरबार किए जाने वाले हैं ! अब जेल को ही घर बनाएंगे ?

‘मोदी’ सरनेम को लेकर दायर किए गए मानहानि के मुक़दमे के एक रुके हुए फ़ैसले ने चौबीस घंटों के भीतर ही एक सौ चालीस करोड़ लोगों के देश की राजनीति को आगे आने वाले सालों के लिए हिलाकर रख दिया।…

शिक्षा : बाधाओं के बीच भी बेहतर प्रबंधन के रास्‍ते खोजने की जरूरत

पिछले 20 वर्षों में हमने अलग-अलग राज्यों में शिक्षा विभाग के 100 प्रिंसिपल सेक्रेटरी के साथ काम किया। उनमें से कम से कम 10 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में अपने राज्य में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित…

असमानता की ‘ऑक्सफैम’ रिपोर्ट : अमीरों पर आरोपित हों भारी टैक्स

बेशर्मी से केन्द्रित होती पूंजी और व्यापक रूप से फलती-फूलती गरीबी ने हमारे यहां जिस तरह की अश्लील गैर-बराबरी को खडा कर दिया है उससे निपटने की तजबीज आखिर कौन देगा? ‘ऑक्सफैम’ सरीखे वैश्विक एनजीओ मानते हैं कि अकूत सम्पत्ति…

क्या मोरबी में भी भोपाल होगा ?

मोरबी की दुर्घटना के बाद भोपाल गैस त्रासदी का हवाला देते हुए चेताया गया था कि लोगों की याददश्त कमज़ोर होती है, वे सब कुछ भूल जाएंगे! मोरबी में पुल टूटने की घटना और गुजरात में मतदान के बीच भी…

राष्ट्रीय खेल दिवस : सेहत बनाने का सीधा, सरल रास्ता

खेलकूद में बच्चों की एक स्वाभाविक रूचि होती है| वे हर समय खेलना चाहते हैं, पर अपने अनुभवों से दबे-पिसे वयस्क उनको पढ़ाई-लिखाई पर अधिक ध्यान देने और खेलकूद पर समय बर्बाद न करने की हिदायतें देते नहीं थकते| पीढ़ियों…

हर घर तिरंगा : तिरंगी कहानी

चीन के माओ-त्से-तुंग कुछ-कुछ अंतराल से अपनी विशाल आबादी को व्यस्त रखने की खातिर कोई-न-कोई मुहीम छेडते रहते थे और जनता उसमें पूरे मनोयोग से लग जाती थी। उनकी यह कारगर शासन-पद्धति थी। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही दौर…

श्रीलंका को लेकर क्या हमें भी डरना चाहिए ?

श्रीलंका की समस्या का जल्दी समाधान नहीं हो पाएगा।देश छोटा है पर उसका संकट काफ़ी बड़ा है।अभी सिर्फ़ एक ही राजपक्षे भाई (गोटाबाया) देश छोड़कर भागा है, बाक़ी सभी श्रीलंका में ही मौजूद हैं।वे आगे कुछ भी कर सकते हैं।…