Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

दुर्गाप्रसाद अग्रवाल

भारतीय डाक विभाग : महंगा हो गया है डाक से किताबें मंगाना

पिछले दिनों, बिना किसी शोर-ओ-गुल के आमफहम किताबें, मुद्रित सामग्री और ‘दूरस्थ शिक्षा’ की पाठ्य-सामग्री तक का परिवहन न सिर्फ मंहगा, बल्कि बंद हो गया है। मोबाइल और उसकी सहचर तकनीक को फिलहाल छोड़ भी दें, तो सरकार की इस…

समसामयिक : पूंजी के लिए कमाया जाता पुण्य

खेलों की तरह हमारे यहां अब त्यौहारों को भी बाजार के हवाले किया जा रहा है। आपसी मेल-मिलाप, आनंद और स्वाद के आधार पर मनाए जाने वाले त्यौहार अब मुहूर्त निकालकर की जाने वाली खरीददारी को अहमियत देने लगे हैं।…

सम सामयिक : आज़ादी का अमृत

आज़ाद भारत की इन 75 वर्षों की यात्रा बहुत रोमांचक, उत्तेजक, आह्लादक और प्रेरक रही है। लम्बी पराधीनता के बाद स्वाधीन हुए देश के सामने अनगिनत चुनौतियां थीं। यह देश का सौभाग्य है कि इसे अपने स्वाधीन होने के तुरंत…

मीडिया की आजादी : मीडिया की मुश्किलें

दुनियाभर के मीडिया पर नजर रखने वाले वैश्विक एनजीओ ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ की हाल में आई बीसवीं रिपोर्ट ने भारत में मीडिया के कामकाज को लेकर कई कठिन सवाल खडे कर दिए हैं। सरकार हमेशा की तरह इस रिपोर्ट को…

मूल्यहीन मीडिया और लोकतंत्र

हमारे समय का मीडिया शायद सर्वाधिक सवालों का सामना करने वाला मीडिया है। इक्का-दुक्का उदाहरणों को छोड दें तो चहुंदिस उसे लेकर एक नकारात्मक छवि ही दिखाई पडती है। ऐसे में मीडिया की सबसे महत्वपूर्ण कडी की बदहाली में आखिर…

राजनीति : हम बदलेंगे, तभी हमारी राजनीति भी बदलेगी

पिछले कुछ समय से एक नया विमर्श और सामने आया है कि जनता को मुफ्तखोर नहीं बनाया जाना चाहिए। इस विमर्श के पैरोकार, जहां भी उन्हें मौका मिलता है, पिछली सरकारों द्वारा हम सब में पनपाई गई इस तथाकथित मुफ्तखोरी…

आज के दौर का ‘1984’

इसरायल में बनाए गए सॉफ्टवेयर ‘पेगासस’ की मार्फत की जा रही जासूसी के प्रकरण में सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमणा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की खंडपीठ ने अपनी टिप्पणी में जॉर्ज ऑरवेल के कालजयी उपन्यास ‘1984’…