Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

जल, जंगल, जमीन

तरुण भारत संघ की स्वर्ण जयंती पर नदियों और समाज को जोड़ने की राष्ट्रव्यापी पहल

भीकमपुर (राजस्थान), 15 मई । पानी की बूंदों से जीवन के ताने-बाने को बुनने वाला संगठन तरुण भारत संघ इस वर्ष अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पिछले 50 वर्षों में जल और समाज के रिश्ते को…

वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी दावों में विरोधाभास : आदिवासियों के अधिकारों पर संकट

मध्यप्रदेश में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी आंकड़ों और दावों में गंभीर विरोधाभास सामने आया है। एनजीटी में प्रस्तुत हलफनामे में जहां 5.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण की बात मानी गई है, वहीं वन विभाग की रिपोर्टें पुराने…

वन्‍य जीवन : बाघों के बहाने वीरान होते गांव

पर्यावरण के पिरामिड की चोटी पर बाघ विराजता है और उस पर मंडराता कोई भी संकट दरअसल पर्यावरण पर संकट माना जाता है। जाहिर है, ऐसे में किसी भी कीमत पर बाघ और उसके लिए जंगल बचाना ‘वैज्ञानिक वानिकी’ की…

पानी, प्रकृति और परिवर्तन के 50 साल,तरुण भारत संघ का स्वर्ण जयंती समारोह 30 मई को भीकमपुरा में

भीकमपुरा (अलवर), 10 मई। जल संरक्षण और ग्रामीण सशक्तिकरण के क्षेत्र में पांच दशक से अधिक समय से कार्यरत तरुण भारत संघ (TBS) अपना स्वर्ण जयंती वर्ष 30 मई 2025 को पूर्ण कर रहा है। इस उपलक्ष्य में एक विशेष…

सहायक नदियों के प्रति सरोकार की जरूरत

बड़ी,बारहमासी नदियों का दोहन करने की सरकारी हुलफुलाहट के साथ-साथ सत्तर के दशक से समाज ने भी इन पर गौर करना और जरूरी हो तो प्रतिरोध करना शुरु कर दिया है, लेकिन इन विशालकाय जल-भंडारों को पोषित करने वाली छोटी,…

पहाड़ों में आपदा

भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ों में विकास योजनाओं की जिद ने जानलेवा आफतें खड़ी की हैं। नतीजे में पहाड़ और उन पर बसा जीवन लगातार आपदाओं की चपेट में बना रहता है। कमाल यह है कि…

इंदौर शहर के बीच जंगल; पोलो ग्राउंड में मियावाकी तकनीक से होगा हरित क्षेत्र का विकास

जैव विविधता बचाने की पर्यावरणविदों की अपील को प्रशासन का समर्थन इंदौर, 30 अप्रैल । मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित ऐतिहासिक पोलोग्राउंड क्षेत्र को सौ प्रतिशत हरित क्षेत्र के रूप में ‘भारत वन’ विकसित करने की पहल को आज एक बड़ी…

विकास की दौड़ में हरियाली की पुकार : जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा

तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास की इस दौड़ में एक ऐसी आवाज़ है जिसे बार-बार अनसुना किया जाता है—जंगलों की। ये जंगल, जो सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं बल्कि जीवन का आधार हैं, हर दिन विकास की कीमत चुका रहे…

कैसे चंबल के खूंखार डाकू बन गए जल संरक्षण के सिपाही

चंबल में तरुण भारत संघ ने जल संरक्षण के ज़रिए बदला बागियों का जीवन राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर फैले चंबल क्षेत्र को कभी डकैतों की धरती कहा जाता था, लेकिन आज यही धरती जल संरक्षण और शांतिपूर्ण जीवन…

बदहाल हैं, यम की बहन यमुना

पुराणों में यमुना को मृत्यु के देवता यम की बहन बताया गया है, लेकिन हमारी आती-जाती सरकारें और जहां-का-तहां बैठा समाज इस धारणा को भी ठेंगे पर मारता है। देश की एन राजधानी में यमुना को बदहाल करने में किसी…