गांधी का ‘हिंद स्वराज’ : उथल-पुथल में उपयोगी
दुनिया के अधिकांश देशों में मची भीषण उथल-पुथल आमतौर पर लोकतंत्र के हवाले से की जा रही है। ऐसे में गांधी होते तो क्या कहते/करते? इंग्लेंड-अफ्रीका की अपनी जहाज-यात्रा में 116 साल पहले लिखी पुस्तिका ‘हिंद स्वराज’ में उन्होंने मौजूदा…
विविधता में एकता ही सर्वश्रेष्ठ भारत की पहचान
राष्ट्रीय एकता केवल भौगोलिक सीमाओं का मेल नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच बंधुत्व, सहिष्णुता और साझा मूल्यों की भावना है, जो भारत को “एकता में अनेकता” का जीवंत उदाहरण बनाती है। सरदार पटेल के एकीकरण से लेकर बाबा आमटे की…
चिंतन : विचार शून्यता और लोकतंत्र
मौजूदा समय में विचार-शून्यता एक बड़े संकट की तरह स्थापित होती जा रही है। यहां तक कि हमारा लोकतंत्र देशी है या विदेशी जैसे आसन्न सवालों को भी अपेक्षित गंभीरता से हल नहीं किया जा रहा। क्या यह अपने समय…
सुप्रीम कोर्ट का एक और बड़ा फैसला मातृत्व अवकाश हर महिला का अधिकार, कोई छीन नहीं सकता
सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व अवकाश पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि यह हर महिला का बुनियादी अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी संस्थान किसी महिला को उसके मातृत्व अवकाश के अधिकार से वंचित…
Waqf Amendment Act : वक्फ-संशोधन के बहाने
पहलगाम की आतंकी दुर्घटना के कारण लोगों की नजरों से थोड़ा ओझल हुए वक्फ-विवाद ने दरअसल हमारी संवैधानिक मान्यताओं और राजनीतिक शिष्टाचार पर सवाल खड़े किए हैं। वक्फ कानून में बदलाव ने कुछ जरूरी मुद्दों को उजागर किया है। वक्फ…
महिला अधिकार : खुद की अहमियत के लिए भी जरूरी है, संपत्ति का अधिकार
महिलाओं के लिए संपत्ति का अधिकार उन्हें केवल पूंजी या वस्तुओं पर मिलकियत भर नहीं देता, बल्कि उनमें एक आत्मविश्वास भी जगाता है। जाहिर है, हमारा मौजूदा सामाजिक ताना-बाना आत्मविश्वास से लबरेज महिला को मंजूर नहीं कर सकता। नतीजे में…
विकास के बरक्स आदिवासी संस्कृति
विकास के मौजूदा धतकरम के मुकाबले दुनियाभर के आदिवासियों की सभ्यता, संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान आदि को देखें तो आसानी से समझा जा सकता है कि हम कथित आधुनिक लोगों को उनसे सीखकर खुद को बचा पाने की जरूरत है। क्या…
संविधान : पर्यावरण के मौलिक अधिकारों से वंचित देशवासी
संविधान ने पर्यावरण को खासी अहमियत दी है, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जाता या आधे-अधूरे मन से लाया जाता है। संविधान में पर्यावरण को लेकर किये गए प्रावधान इस विषय की ओर संवेदनशीलता दर्शाते हैं। संविधान के ऐसे…
संविधान की साख पर सवाल
साढ़े सात दशकों के हमारे संविधान को लेकर इन दिनों भारी उथल-पुथल मची है। एक पक्ष मानता है कि भारत सरीखे बहुलतावादी देश में संविधान ही है जिसने सभी को समानता की बुनियाद पर जोड़कर रखा है। एक और पक्ष…
प्रजा के हित में प्रजातंत्र
अपनी शुरुआत में भले ही प्रजातंत्र ने गहरी असहमतियां झेली हों, लेकिन धीरे-धीरे वह एक ऐसी शासन-प्रणाली बन गया जिसके बिना दुनिया के अधिकांश देश अपने काम-काज नहीं चला पाते। जिन देशों में प्रजातंत्र नहीं है वहां उसे लाने के…









