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इंदौर : स्वच्छता के तमगे और दूषित पानी की सच्चाई 

इंदौर को वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिलता रहा है, लेकिन दूषित पेयजल से हुई 14 मौतों ने इस छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा बताता है कि स्वच्छता के दावों के…

इंदौर में नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध न हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक

सभी को पीने के स्वच्छ पानी का अधिकार मिले : जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश इंदौर, 1 जनवरी।  ‘’स्वच्छ शहर” के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध न हो पाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण…

वर्ष 2026 : नए वर्ष में उम्मीद का एक दिया जलाएं

वर्ष 2025 के अंत और 2026 के आरंभ के साथ दुनिया एक गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। बढ़ती असमानताएँ, गंभीर होता पर्यावरण संकट, निशस्त्रीकरण में पीछे हटना और एआई–आधारित हथियारों का प्रसार मानवता के सामने नई चुनौतियाँ…

‘मनरेगा’ को मारकर आया ‘जी राम जी’

बीस साल पहले जिस संसद ने रोजगार की मांग आधारित गारंटी के जिस अनूठे कानून को सर्वसम्मति से पारित किया था, उसी संसद ने अभी पिछले हफ्ते उसी कानून को खारिज कर नए ‘वीबी – जी राम जी’ कानून को…

अरावली मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम

नई उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन का आदेश, 20 नवंबर के फैसले पर लगी रोक नई दिल्ली, 29 दिसंबर। अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और दूरगामी प्रभाव वाले मामले में Supreme Court ने बड़ा हस्तक्षेप…

अब तक लटका है, ‘सरदार सरोवर’ का पुनर्वास

‘सरदार सरोवर’ के शुरुआती दौर में तब के ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ के उपाध्यक्ष सुशीलचन्द्र वर्मा ने अपनी किताब में दुनिया का सर्वोत्तम विस्थापन-पुनर्वास बताते हुए जिस तरह परियोजना के कसीदे पढ़े थे,आज वे धूल-धूसरित दिखाई दे रहे हैं। बांध…

अरावली बचाने के लिए पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह की सुप्रीम कोर्ट से गुहार, स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह

नई दिल्ली 27 दिसंबर।  देश की प्राचीन और जीवनदायिनी अरावली पर्वतमाला पर गहराते संकट को लेकर प्रसिद्ध पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने न्यायालय से अरावली के संरक्षण के लिए…

भूमि की बिगड़ती सेहत और किसान

भारत में भूमि क्षरण अब एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। अत्यधिक कृषि गतिविधियाँ, रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग, शहरीकरण, औद्योगीकरण और जल संसाधनों का असंतुलित दोहन देश की 30 प्रतिशत से अधिक भूमि की सेहत बिगाड़…

16 जनवरी को बीज, बिजली और श्रम विधेयकों के विरोध में गाँव-गाँव ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने का ऐलान

नईदिल्‍ली, 22 दिसंबर। बीज विधेयक 2025, विद्युत विधेयक 2025,  गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAMG अधिनियम 2025), चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने, सभी फसलों के लिए MSP@C2+50 प्रतिशत (गारंटीकृत खरीद सहित) का कानून बनाने और व्यापक कर्ज…

स्वास्थ्य सेवाओं में पीपीपी पर उठे सवाल, निजीकरण को बताया जनहित के लिए खतरा

भोपाल, 22 दिसंबर। स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा में सार्वजनिक–निजी भागीदारी (पीपीपी) के बढ़ते प्रयोग को लेकर जन स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों ने गहरी चिंता जताई है। सोमवार को भोपाल में ‘एक्‍शन अगेन्‍स प्रायवेटाइजेशन आफ मेडिकल एजुकेशन एवं हेल्‍थ सर्विसेस’…