Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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वंदे मातरम की विरासत

अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा के चुनाव ने हमें अचानक ‘वंदेमातरम’ के डेढ़ सौवें वर्ष की याद दिला दी है, लेकिन इस तात्कालिक जरूरत के बावजूद ‘वंदेमातरम’ हमारे बेहद गौरवशाली अतीत को उजागर कर देता है। अरविंद जयतिलक भारत ‘वंदेमातरम’ गीत…

खतरनाक मोड़ पर देश के बांध : जरूरी है बांधों की तत्काल मरम्मत

संसद में सरकार की स्वीकारोक्ति ने देश के जल-संरचनात्मक संकट की गंभीरता उजागर कर दी है। देशभर में 216 बड़े बांध खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं और उनकी तत्काल मरम्मत जरूरी है। यह आंकड़ा केवल तकनीकी चेतावनी नहीं, बल्कि…

संवेदनशील विज्ञान से ही जलवायु संकट का समाधान संभव : राजेंद्र सिंह

अहमदाबाद, 19 दिसंबर। प्रसिद्ध जल संरक्षण कार्यकर्ता और मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने कहा है कि अभियांत्रिकी, प्रौद्योगिकी और विज्ञान यदि संवेदनशील, अहिंसक और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ें, तभी वैश्विक जलवायु परिवर्तन के संकट का स्थायी समाधान…

विकास : खनन से खत्म होते पहाड़

विकास के नाम पर होने वाले विनाश में जल, जंगल और जमीन के साथ अब पहाडों का नाम भी जुड़ गया है। पहाड़ के विनाश में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सीधे निशाने पर हैं। मनुष्य अपने जीवन की अंतहीन आवश्यकताओं…

स्मृति शेष : संज्ञा की बजाय क्रिया के अनुपम

अनुपम मिश्र को शरीर छोड़े एक दशक हो रहा है, लेकिन पानी और पर्यावरण पर मंडराते संकटों में उनकी चेतावनी आज और तेज़ सुनाई देती है। उन्होंने बार-बार बताया कि जल की कमी प्रकृति की नहीं, समाज की असंवेदनशीलता की…

एक थे अनुपम मिश्र, सचमुच के अनुपम

अनुपम मिश्र को हमसे विदा हुए नौ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन पानी, पर्यावरण और सादगी को लेकर उनकी दृष्टि आज भी उतनी ही जीवित है। ऐसे समय में, जब विकास पर्यावरण पर भारी पड़ रहा है, अनुपम मिश्र का…

मनुष्य, प्रकृति और समाज के पक्ष में हर वक्‍त खड़े रहे माणकचंद कटारिया : मेधा पाटकर

माणकचंद कटारिया की जन्मशताब्‍दी पर स्मरण–संवाद कार्यक्रम में ‘अहिंसा कुछ करने को कहती है’ का विमोचन इंदौर, 14 दिसंबर। ‘’माणकचंद कटारिया मध्यप्रदेश के गांधी ही नहीं, बल्कि अपने समय की एक आंधी भी थे। उन्होंने हर उस मुद्दे पर लिखा…

माणकचंद कटारिया : अहिंसा और कर्म की साधना

स्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय साक्षी और गांधीवादी विचारक माणकचंद कटारिया (1925–1977) का जीवन सेवा, वैचारिक स्पष्टता और आत्मसंयम की मिसाल है। बाल्यावस्था से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय कटारिया ने राजनीति से अधिक समाज-निर्माण को महत्व दिया। इस गांधीवादी विचारक की…

विद्युत सुधार : निजीकरण के सौ बहाने

करीब दो दशक पहले ‘टाटाराव कमेटी’ ने घाटे में चल रहे ‘मध्यप्रदेश विद्युत मंडल’ को ‘मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड’ में तब्दील करके दावा किया था कि अब इसके अंतर्गत बनी ‘मध्यक्षेत्र,’ ‘पूर्व क्षेत्र’ और ‘पश्चिम क्षेत्र’ की तीन कंपनियां…

अरावली पर बढ़ते खनन संकट के विरुद्ध संकल्प : अरावली पर्वतमाला को बचाने की पुकार

विश्व पर्वत दिवस पर अरावली का संकट राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। निर्णयों ने पर्वतमाला के बड़े हिस्से को खनन के लिए सौंपने का रास्ता खोल दिया है, जिससे गाँवों की जल–कृषि व्यवस्था, वन्यजीवों का जीवन और पर्यावरणीय…