पर्यावरण : हीरे से महंगी हरीतिमा
छतरपुर जिले के बक्सवाहा में हीरे के लिए काटे जाने वाले जंगलों की कीमत आखिर क्या है? जिस तरह हीरे की कीमत उसकी कठोरता और चमक आदि के आधार पर तय की जाती है, ठीक उसी तरह पेडों की कीमत…
गेल ऑमवेट : एक अनूठे व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि
पिछले दिनों देश की प्रमुख समाजशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता गेल ऑमवेट का निधन हो गया है। ऑमवेट ने भारतीय समाज के हर उस पहलू के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जिसने समाज के कमजोर वर्गों को आवाज़ दी…
असम-मिजोरम विवाद : टूटती धर्मनिपेक्षता की धुरी
अभी हाल में असम-मिजोरम विवाद ने भारी सुर्खियां बटोरी थीं। सम्पूर्ण-प्रभुसत्ता-सम्पन्न भारत गणराज्य के ये दोनों राज्य दुश्मनों की तरह आखिर क्यों लडे थे? क्या थे, उनके बीच के मुद्दे और राजनीति? करोड़ों भारतीय आतुर थे कि हमारे देश के…
किसानी, जवानी और पानी बचाने के लिए किसान स्वराज यात्रा निकलेगी
गांधी जयंती से शुरू होकर संविधान दिवस पर दिल्ली में होगी समाप्त किसानी, जवानी और पानी बचाने के लिए किसान स्वराज यात्रा निकाली जाएगी। इसका आह्वान मशहूर पर्यावरणविद और जल संरक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह ने किया है। विश्व अहिंसा दिवस…
खाद्य-तेल के लिए खजूर की खेती
खाद्य तेल का टोटा हमें अक्सर विदेशों से आयात की तरफ धकेलता रहता है और इसी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने हाल में खजूर के तेल (पाम-आयल) की खातिर खजूर की खेती प्रस्तावित की है। लेकिन क्या खजूर की…
खेल और खिलाड़ी से पूंजी के खिलवाड़
हमारे समय में खेल तक पैसा कमाने का एक ऐसा जरिया बन गए हैं जिसमें चांदी काटने के लिए तरह-तरह के हथकंडे किए जाते हैं। हाल का टोकियो ओलिंपिक भी इससे अछूता नहीं रहा है। खिलाड़यों के रिकार्ड और मेडल…
नर्मदा को निगलती ‘विकास’ परियोजनाएं
आधुनिक विकास को विनाश में तब्दील होते देखना हो तो देश के ठीक बीच से प्रवाहित नर्मदा नदी के साथ किया जाने वाला दुर्व्यवहार देख लेना चाहिए। यह जानना सचमुच बेहद दुखदायी है कि कोई सत्ता और समाज कैसे अपनी…
नजरिया : क्या भूलूं, क्या याद करूं?
हम क्या भूलें ? उस दरिंदगी को भूलें जिसे विभीषिका कहा जा रहा है। वह विभीषिका नहीं थी, क्योंकि वह आसमानी नहीं, इंसानी थी। उसे इतिहास के किसी अंधेरे कोने में दफ्न हो जाने देना चाहिए क्योंकि वह हमें गिराता…
विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे पर लंबा, प्रभावशाली और अहिंसक कोई दूसरा आंदोलन नहीं
नर्मदा बचाओ आंदोलन : संघर्ष और रचना के 36 वर्ष नर्मदा बचाओ आंदोलन ने देश और दुनिया में वैकल्पिक विकास के मॉडल की ओर ध्यान आकृष्ट करने में सफलता पाई है । दुनिया के इतिहास में जमीनी स्तर पर विस्थापन…
विभाजन विभीषिका स्मृति : अतीत की स्मृतियों की ओर धकेलने का मकसद
आज़ादी के वक्त हुए विभाजन की विभीषिका का ईमानदार नीयत से किया जाने वाला कोई भी स्मरण उन आंतरिक विभाजनों को नियंत्रित करेगा जो नागरिकों को अलग-अलग समूहों में बाँटकर उन्हें अपनी स्वतंत्रता के प्रति आशंकित कर सकते हैं। इतना…























