युवा : आज्ञाओं के असर में बेरोजगार
आज के दौर में भारत की अधिकांश कामकाजी आबादी युवा है, लेकिन उसे हम उपयुक्त रोजगार मुहैय्या नहीं करवा पा रहे। नतीजे में वह आज्ञाओं, आदेशों की दम पर खडी जमातों का हिस्सा बनकर तरह-तरह की वैध-अवैध गतिविधियों में लग…
उन्नीस बनाम छियान्नबे : अपने-अपने आपातकाल
लगभग पांच दशक पहले इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल सत्ता के लिए निजी हुलफुलाहट के अलावा राज्य के सर्वशक्तिमान बनते जाने को भी उजागर करता है। क्या होता है, जब राज्य सारे जहां की वैध-अवैध शक्तियां अपने तईं जमा…
क्या उदयपुर से होगा नई समझ का उदय
राजस्थान के उदयपुर में जो हुआ, उसके बारे में कोई लिखे भी तो क्या! इस देश की दुर्दशा कहाँ तक होगी, इसका अंदाजा लगाना ही मुश्किल है| धर्म या किसी विचारधारा के नाम पर होने वाली हिंसा मानव इतिहास में…
हमें चाहिए ऐसा राष्ट्रपति
भारतीय संसदीय लोकतंत्र भी और राष्ट्र के रूप में भारत भी एक बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा है. आज 75 साल पुराने संसदीय लोकतंत्र को पटरी पर बनाए रखने तथा उसके विकास की संभावनाओं को पुख्ता करने की…
महाराष्ट्र : दलबदल कानून और उप-सभापति की भूमिका
यह सही है कि दलबदल कानून दलबदल को कुछ हद तक नियंत्रित करता है। यह किसी पार्टी के विभाजन को मान्यता नहीं देता है। लेकिन यह विलय को मान्यता देता है। ऐसे समय विधानसभा के सभापति की भूमिका महत्वपूर्ण होती…
लोकतंत्र की डूबती लुटिया
दुनिया के अधिकांश देशों में राज-काज चलाने के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय और सफल प्रणाली लोकतंत्र मानी जाती है, लेकिन क्या वह अपने घोषित उद्देश्यों के मुताबिक अमल में लाई जा रही है? क्या हमारे देश में लोकतांत्रिक प्रणाली कारगर साबित…
महाराष्ट्र : मौजूदा राजनीतिक संकट और दलबदल विरोधी कानून
महाराष्ट्र में शिव सैनिकों के दलबदल की घटनाओं ने एक बार पुनः दलबदल कानून और उसके प्रावधानों की ओर आम जनता का ध्यान आकर्षित किया है। वे यह जानना चाहते हैं कि यह कानून इस मामले में कितना प्रभावी होगा।…
अब्बास की प्रधानमंत्री को याद क्यों आ गई ?
दुनिया जानती है कि पीएम इस समय एक साथ कई कामों और चिंताओं से घिरे हुए हैं।’अग्निवीर’ योजना को लेकर देश के अंदर मचे घमासान और नूपुर शर्मा-नवीन जिंदल द्वारा की गई टिप्पणियों के कारण अल्पसंख्यक समुदाय और मुसलिम मुल्कों…
सौ साल का ‘मुलशी सत्याग्रह’ : अस्सी साल की किताब
कम ही लोगों को मालूम होगा कि विस्थापन-पुनर्वास से लेकर विकास की अवधारण तक पर सवाल उठाने वाली बांध विरोध की ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की लडाई सौ साल पुराने ‘मुलशी सत्याग्रह’ की विरासत का ही एक पडाव है। उस जमाने…
International Yoga Day 2022 : खूब बिकने वाला सामान भी है ‘योगा’
चालीस अरब डॉलर का है योग उद्योग| योग से मिली उर्जा का उपयोग पूंजीवादी अच्छी तरह करते हैं। योग से कर्मचारी ज्यादा उर्जावान महसूस करेंगे और ज्यादा काम करने में सक्षम होंगें। काम से होने वाले तनाव को भी योग…























