देश के संसदीय इतिहास का इसे अभूतपूर्व क्षण माना जाना चाहिए कि दोनों सदनों में करोड़ों देशवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 260 सांसद विरोध स्वरूप अनुपस्थित थे। उनका बहिष्कार इस बात को लेकर था कि नई संसद का उद्घाटन प्रधानमंत्री…
दिनों-दिन बढ़ते-फैलते शहर धीरे-धीरे हमारे जीवन के विपरीत और असहनीय होते जा रहे हैं। कोविड-काल में हजारों-हजार मजदूरों ने महानगरों से वापस अपने-अपने गांवों की ओर लौटकर इसकी तस्दीक भी की है। तो क्या शहरों को छोड़कर जीवन की कोई…
कमलेश कमल (साहित्य), जनक दबे (पत्रकारिता), सीताराम (शिक्षा) और अर्पणा (कला) के लिए होंगें सम्मानित नई दिल्ली, 31 मई। प्लास्टिक के विरोध में गांव -गांव और शहर -शहर में सघन अभियान चलाने वाली डॉ. अनुभा पुंढीर को समाज सेवा और…
एनजीटी स्वच्छ भारत मिशन का सपना साकार कर ही चैन की सांस लेगी। इसके लिए बेहतर कचरा प्रबंधन की सराहना की जा रही है। सिक्किम, सूरत और इंदौर ही नहीं बल्कि तेलंगाना का सूर्यापेट और तमिलनाडु का नामक्कल भी इस…
नदियों पर अनुसंधान के लिए एक संस्थान बनाने की मांग भोपाल, 30 मई । जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एन.ए.पी.एम) ने मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में 1-2 अप्रैल, 2023 को सम्पन्न हुए राष्ट्रीय जल-जंगल-जमीन और ‘विकास’ सम्मेलन में पारित…
तीन दशक पहले 73वें संविधान संशोधन की मार्फत पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण मिला था। आज उस आरक्षण के बूते सक्षम हुईं महिलाओं की क्या स्थिति है? ग्रामीण महिलाएं घर सजाने, खाना बनाने, बच्चे पालने और कपड़े सिलने के अलावा…
लेखक और पर्यावरणविद् पंकज चतुर्वेदी पाठकों के लिए सुपरिचित नाम है। हाल में शहरों के जल संकट पर उनकी एक किताब आई है। रोहित कौशिक द्वारा ‘सप्रेस’ के लिए की गई इसी किताब की समीक्षा। ज्यों-ज्यों जल संकट बढ़ रहा…
दुनियाभर के राजनीतिक विश्लेषक प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली की अहमियत और श्रेष्ठता पर कमोबेश एकमत हैं। सभी मानते हैं कि अपनी तमाम कमी-बेसियों के बावजूद प्रजातांत्रिक व्यवस्था किसी भी समाज को बेहतर बनाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली…
डेढ दशक पहले अमरीका के साथ होने वाले जिस परमाणु समझौते को लेकर तब की मनमोहन सिंह सरकर गिरने-गिरने को हो गई थी, आज वही परमाणु ऊर्जा खुल्लम-खुल्ला धंधे में उतर आई हैं। दुनियाभर में गरियाई जा रही यह ऊर्जा…
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने ‘एक दिन के डिक्टेटर’ बनने पर जिस शराब को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के मंसूबे बांधे थे, वही शराब सरकारों की राजस्व उगााही का बडा स्रोत बन गई है। शराबबंदी का मुद्दा उभरते ही हर…