Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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आर्द्रभूमि से होता है, जलवायु संकट पर नियंत्रण

‘वेटलेंड’ यानि आर्द्रभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले अपने आसपास के ताल-तलैया, विशाल जलाशय और तटीय इलाके हजारों हजार जैविक इकाइयों का ठिकाना भर नहीं होते, बल्कि उनके भरोसे आज के सबसे बड़े जलवायु परिवर्तन के संकट से भी…

लोक गायक कालूराम बामनिया : मालवा के कबीर

‘मालवा के कबीर’ के नाम से मशहूर लोक गायक कालूराम बामनिया को पदमश्री अवार्ड से सम्मानित करने की घोषणा गणतंत्र दिवस के मौके पर की गई है। देवास जिले के टोंकखुर्द के रहने वाले कालूराम पारंपरिक निर्गुण भक्ति के गायक…

जनता के स्वास्थ्य की अनदेखी करता अन्तरिम बजट; स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में आवंटन एक छलावा

पिछले वर्ष की तुलना में इस बजट में मात्र 1.69% रुपए का अधिक आवंटन इंदौर, 2 फरवरी। जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान मध्‍यप्रदेश ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतरमन द्वारा पेश किये गए…

परमार्थ : गांव में टिकाऊ आजीविका

थोडी समझदारी और सहयोग से काम किया जाए तो खेती आज भी रोजगार का बेहतरीन जरिया बन सकती है। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में सक्रिय स्वयंसेवी संस्था ‘परमार्थ’ ने इसी का प्रयास किया है। सोना सहरिया एक आदिवासी महिला है…

पक्षियों से पहचान की अहमियत

पक्षियों और आसपास के जीव-जन्तुओं को जानना-समझना इंसानी वजूद के लिए बेहद उपयोगी होता है, लेकिन आजकल की आपाधापी में हम इसे भूलते जा रहे हैं। पक्षियों से कैसे दोस्ती बनाए रखी जा सकती है? पक्षी-प्रेमी डॉ. लोकेश तमगीरे से…

मध्‍यप्रदेश : बसनिया बांध की वापसी

कुछ साल पहले कृतिपय बांधों को निरस्त कर देने की मध्यप्रदेश सरकार की घोषणा ने नर्मदा घाटी के रहवासियों को राहत दी थी, लेकिन अब दी गई प्रशासनिक स्वीकृति ने उन्हें फिर चिंता में डाल दिया है। बड़े बांधों को…

164 साल पहले पेश हुआ था भारत का पहला बजट

आज 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत का आम बजट पेश किया जाएगा। बजट निर्माण की पूरी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की ही होती है और यह लगातार छठा ऐसा अवसर है, आज 1 फरवरी को…

गांधी पुण्‍य स्‍मरण : साकार गांधी,निराकार गांधी!

आज से 76 साल पहले महात्मा गांधी हम सबसे सदा के लिए विदा हुए थे। उनके जाने के बाद का समय हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का समय रहा है, लेकिन इस दौर में गांधी एक प्रस्थान–बिन्दु की तरह…

गांधी स्‍मरण : संकट में सुध गांधी की

धरती का जीवन बचाने की खातिर वैश्विक जमावडे ‘कॉप 28’ की विफलताओं के सामने अब महात्मा गांधी खडे किए जा रहे हैं और कमाल यह है कि यह पहल मौजूदा संकटों को पैदा करने वाले पश्चिमी समाज की तरफ से…

महात्‍मा गांधी की कला-दृष्टि

राममनोहर लोहिया ने जिन्हें ‘सरकारी’ और ‘मठी’ गांधीवादी कहा था उनमें से अधिकांश ने अपने निजी और सार्वजनिक व्यवहार से गांधी को एक बेहद नीरस, कला विरोधी और मालवी में कहें तो लगभग ‘सूमडा’ की तरह स्थापित किया है। इसके…