डॉ. एस. एन. सुब्बराव : श्रमसंस्कार, सेवा व मानवीय मूल्यों का प्रेरणा पुंज व्यक्तित्व
युवाओं को सेवा, श्रम और राष्ट्रभाव से जोड़ने वाले प्रख्यात गांधीवादी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ का जीवन स्वयं एक चलता-फिरता संदेश था। सीमित साधनों में उन्होंने देशभर में युवा चेतना की मशाल जलाई और गांधी विचार को व्यवहार में उतारा।…
7 फरवरी जयंती : राष्ट्र-भक्ति और गांधीवादी मूल्यों के प्रतीक एस. एन. सुब्बराव
प्रख्यात गांधीवादी और सर्वोदयी नेता डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ युवाओं को यही जीवन-दृष्टि सिखाते थे कि हर छोटा कार्य भी देश और समाज से जुड़ सकता है। उनकी 97वीं जयंती पर सेवा, अहिंसा, सद्भाव और चरित्र-निर्माण के उनके जीवंत संदेश…
गांधी कर्म के दार्शनिक थे, भाषणों के नहीं : साहित्यकार विजय बहादुर सिंह
भोपाल, 30 जनवरी। ‘’महात्मा गांधी केवल विचारक या नेता नहीं थे, बल्कि वे कर्म के दार्शनिक थे। उनका दर्शन बोलने में नहीं, बल्कि करने में प्रकट होता है। गांधी को समझने के लिए उन्हें देवता की तरह पूजने के बजाय…
गांधी विचार आज भी दुनिया की नैतिक पूँजी : चंद्रकांत झटाले
लोक संवाद–विचार मंच द्वारा सामाजिक सदभाव के लिए बलिदान विषय पर व्याख्यान इंदौर, 30 जनवरी। ”दुनिया आज भी भारत को महात्मा गांधी के नाम से जानती है।क्योंकि गांधी किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि एक नैतिक दृष्टि हैं। गांधी अहिंसा को कायरता…
गांधीजी ने सत्य, अहिंसा, शुचिता, स्वदेशी और स्वाध्याय के बल पर देश को आजादी दिलाई
शहीद दिवस पर ‘मोहन से महात्मा तक’ कार्यक्रम में भारती दीक्षित ने प्रस्तुत की दास्तानगोई इंदौर 30 जनवरी। गांधीजी उस महान व्यक्तित्व का नाम था, जिनके पास न सत्ता थी, न पद था, न सिंहासन था, लेकिन हौसले इतने बुलंद…
गांधी पुण्य स्मरण : कोई अदृश्य ताक़त ही गांधी को मरने से बचा रही है ?
गांधी की हत्या के बाद फाँसी तक के 655 दिनों में नाथूराम गोडसे इस भ्रम में जीता रहा कि उसने गांधी के साथ उनके विचारों को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। लेकिन इतिहास ने साबित किया कि…
हे राम, साकार गांधी निराकार गांधी !
30 जनवरी 1948 की संध्या, बिड़ला भवन में प्रार्थना के लिए बढ़ते महात्मा गांधी “हे राम” के अंतिम शब्दों के साथ साकार से निराकार में विलीन हो गए। उनका महाप्रयाण केवल एक देह का अंत नहीं था, बल्कि सत्य, अहिंसा…
महात्मा गांधी की धार्मिक आस्था
खुद को सनातनी हिन्दू मानने वाले महात्मा गांधी आखिर कैसे हिन्दू थे? क्या किसी खास धर्म का अनुयायी होने के साथ-साथ गांधी की तरह उदारता को आत्मसात किया जा सकता है? आज देश में धर्म के नाम पर काफी राजनैतिक…
Let’s Kill Gandhi : गांधी की हत्या, सच की हत्या और स्मृति की राजनीति
गांधी निर्वाण दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास से सामना करने की जिम्मेदारी भी है। तुषार गांधी की पुस्तक “Let’s Kill Gandhi” उस सच को उजागर करती है, जिसे वर्षों से ढका गया। यह बताती है कि गांधी…
गांधी पुण्यतिथि 30 जनवरी : गांधी से सीखने के युवा शिविर
किसी विचार को सीखने, समझने के लिए शिविर और संभाषण बेहतरीन माध्यम होते हैं। गांधी विचार को सीखने, समझने के लिए भी नारायण भाई देसाई और डॉ. एसएन सुब्बराव ने इन्हीं पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया था। क्या होता था,…









