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महात्मा गांधी के विचार नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक : राज्यपाल

भोपाल, 2 अक्टूबर। गांधी भवन,भोपाल के मुख्य सभागार में आयोजित गांधी जयंती समारोह में प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और आदर्श नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बापू के जीवन दर्शन को आत्मसात करें और नैतिक मूल्यों की शुचिता को अपने आचरण का हिस्सा बनाएं। राज्यपाल ने स्वदेशी को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि सुबह से रात तक उपयोग में आने वाली वस्तुएँ अपने ही देश में निर्मित होनी चाहिए।

समारोह के अध्यक्ष पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर ने अपने उद्बोधन में कहा कि बापू का चरित जीवन की सार्थकता का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि आज की चुनौतियों का समाधान महात्मा गांधी की शिक्षाओं और सत्य मार्ग को अपनाने से ही संभव है।

मुख्य व्याख्यान में प्रसिद्ध चिंतक और समाजवादी विचारक रघु ठाकुर ने ‘गांधी के राम’ विषय पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गांधी के राम भेदभाव नहीं करते, वे सबकी कुशल मंगल की कामना करते हैं। ठाकुर ने बताया कि गांधी के लिए राम सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि निराशा के अंधकार में उजाले का स्रोत और निर्बल के संबल हैं। उन्होंने गांधी द्वारा वर्णित राम के चार स्वरूपों—अनंत राम, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, राजा राम और निर्बल के राम—का विस्तृत वर्णन किया।

उन्‍होंने कहा कि गांधी प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे, वे ऐलौपैथी के विरोधी थे। जब अफ्रीका में बेटा बीमार हुआ, मरणासन्न अवस्था में था, यदि कुछ हो जाता तो कस्तूरबा को क्या जवाब देते, ऐसी अवस्था में राम का ही भरोसा कर प्राकृतिक तरीके से बेटे के ठीक होने‌ में विश्वास जताया। सही अर्थों में गांधी ने राम की परीक्षा ली।

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आगा खां जेल में जब कस्तूरबा की स्थिति बिगड़ने लगी और डॉ ने‌ कहा पेनिसिलिन का इंजेक्शन देना होगा। पर गांधी ने‌ इंजैक्शन देने‌ से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा बचाने वाला भी राम है ‌और नहीं बचाने वाला भी राम ही है। जो कोई कमजोर है, मन से पीड़ित है, दुर्बल है उनके सबके लिये राम है।  गांधी के राम की कल्पना को समाहित करते हुए श्री‌ रघु‌ ठाकुर ने बाल्मीकि रामायण में उद्धृत व्याख्या तथा पात्रों के साथ राम को व्याख्यायित किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने “आओ! जाने गांधी को” श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों और विद्यालयों को पुरस्कार भी प्रदान किए।

समारोह में विशेष अतिथि के रूप में केंद्रीय कृषि मंत्री तथा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। उन्होंने अपने भावुक उद्बोधन में कहा कि आज देश बापू से पुकार रहा है—“एक बार फिर लौट आओ।” श्री चौहान ने गांधी भवन की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उनके आह्वान पर सभागार में उपस्थित वरिष्ठजन गुरुशरण अरोरा, महेंद्र शर्मा और कन्हैया लाल यादव ने तुरंत सहयोग राशि भी प्रदान की।

गांधी भवन न्यास के सचिव दयाराम नामदेव ने अतिथियों का स्वागत किया तथा संचालन न्यासी महेश सक्सेना ने किया। वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने आभार ज्ञापित करते हुए गांधी भवन पर 57 लाख रुपये संपत्तिकर की देनदारी और संस्था की वित्तीय कठिनाइयों का उल्लेख किया तथा समाज व सरकार से सहयोग की अपील की।

समारोह के समन्वय सूत्रधार न्यासी अंकित मिश्र, एडवोकेट मोहन दीक्षित और सुश्री भगवती कड़वे रहे। इस अवसर पर जाने-माने कवि व पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना भी उपस्थित थे। गांधी भवन परिवार के सुनील शेट्टी, सुनील मालवीय, इंद्रमणि, पवन दुबे, गोटा बाई, वीरेंद्र, सुभाष, मुकेश और चिमनजी सहित अनेक सदस्यों ने कार्यक्रम की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाई।

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