Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

शख्सियत

ओडिशा के वॉटर मैन रंजन पांडा को मिला ओडिशा लीडरशिप अवॉर्ड 2025

जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सक्रिय हैं रंजन पांडा देश के अग्रणी पर्यावरणविदों में से प्रमुख रंजन पांडा, जिन्हें ‘वॉटर मैन ऑफ ओडिशा’ और ‘क्लाइमेट क्रूसेडर’ के रूप में जाना जाता है, को वर्ल्ड…

विदा कोटमराजू विक्रम राव : जिसने लिखा, जमकर लिखा, और अंतिम साँस तक लिखा

वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और भारतीय कार्यरत पत्रकार महासंघ (IFWJ) के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे कोटमराजू विक्रम राव का 12 मई 2025 को लखनऊ में 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से श्वसन संबंधी…

संघमित्रा  गाडेकर : जगहें तेज़ी से ख़ाली हो रही हैं, भर जरा भी नहीं रहीं !

संघमित्रा गाडेकर (उमा जी) की चुपचाप हुई विदाई के साथ जैसे एक युग भी विदा हो गया—राजघाट की स्मृतियाँ, सर्वोदय शिविरों की ऊष्मा और खादी में लिपटी उनकी शांत उपस्थिति अब स्मरण में रह गई हैं। वे एक चिकित्सक से…

डॉ. संघमित्रा गाडेकर नहीं रहीं — विज्ञान, सेवा और संघर्ष का विलक्षण संगम थी उनकी जीवनयात्रा

संपूर्ण क्रांति विद्यालय, सर्वोदय आंदोलन और परमाणु-विकिरण विरोधी अभियानों की एक निर्भीक आवाज अब खामोश हो गई है सूरत, 29 अप्रैल। सर्वोदय आंदोलन की वरिष्ठ नेत्री, चिकित्सक, गांधीवादी कार्यकर्ता और परमाणु ऊर्जा नीति की आलोचक डॉ. संघमित्रा गाडेकर Dr. Sanghamitra…

सेवा, संकल्प और स्मृति के साथ जिम्मी मगिलिगन को समर्पित सस्टेनेबल सप्ताह का समापन

इंदौर, 23 अप्रैल। पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के दिवंगत पति, ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित जेम्स (जिम्मी) मगिलिगन की 14वीं पुण्यतिथि पर आयोजित ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह’ का समापन ग्राम सनावादिया स्थित उनके निवास गिरिदर्शन में एक प्रार्थना सभा…

18 अप्रैल: भूदान आंदोलन के माध्यम से संत विनोबा की अहिंसक क्रांति

जब दुनिया ने बदलाव के लिए हिंसा का शोर चुना, तब विनोबा भावे ने मौन पदचाप से क्रांति की इबारत लिखी। 18 अप्रैल 1951 को पोचमपल्ली से शुरू हुआ भूदान आंदोलन इस विश्वास का प्रतीक बन गया कि सच्चा परिवर्तन…

धरती के सच्चे सेवक: ट्री-मेन दरिपल्ली रामैया

दरिपल्ली रामैया का जीवन पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल रहा। उन्होंने अकेले ही एक करोड़ से अधिक पौधे रोपकर बंजर ज़मीनों को हरित बना दिया। बीज जेब में और पौधों का सपना आंखों में लिए वे जीवन भर पेड़ लगाते…

बाबा साहेब को आज समझने की जरूरत है

डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जो समानता, न्याय और मानव गरिमा की अलख जगाते हैं। 14 अप्रैल 1891 को जन्मे अम्बेडकर ने जीवनभर जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया और संविधान निर्माता बनकर भारत…

विनोबा विचार की अप्रतिम भाष्यकार कालिंदी बहन का पवनार में निधन

साधना, सेवा और सादगी की प्रतिमूर्ति थी कालिंदी बहन पवनार, 8 अप्रैल। सर्वोदय विचारक, आचार्य विनोबा भावे की प्रिय शिष्या और ब्रह्मविद्या मंदिर, पवनार की प्रमुख साधिका सुश्री कालिंदी ताई का मंगलवार सुबह 5 बजे 93 वर्ष की आयु में…

नीलम बेन पारिख का 93 वर्ष की उम्र में निधन, महात्मा गांधी की परपोती थीं

नवसारी, 2 अप्रैल । महात्मा गांधी की परपोती नीलम बेन पारिख ने मंगलवार को 93 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वह नवसारी के अलका सोसाइटी में अपने बेटे डॉ. समीर पारिख के साथ रहती थीं। उनका अंतिम संस्कार…