ओरण के अस्तित्व के लिए ‘राष्ट्रीय गोसेवा नीति’
अरावली संरक्षण को लेकर उठे हाल के जनांदोलन ने एक बार फिर चरोखर यानि ‘ओरण’ और दुधारू पशुओं की अहमियत भी उजागर कर दी है। दरअसल पर्यावरण आसपास की तमाम-ओ-तमाम प्राकृतिक इकाइयों के मिलने से बनता है जिनमें चरोखर और…
खेती को खतरे में धकेलते व्यापार समझौते और कानून
पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने ‘यूरोपियन संघ’ और अमरीका के साथ दो अलग-अलग व्यापार समझौते किए हैं। इन दोनों समझौतों में ‘यूरोपियन संघ’ के 27 देशों और अमरीका के भारी-भरकम सब्सीडी वाले कृषि उत्पादों को भारत में खपाने की…
आम बजट 2026 : ग्रामीण समृद्धि की रीढ़ बनेगा पशुधन
ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था अब केवल खेती पर निर्भर नहीं रही है। आम बजट में पशुधन, दुग्ध, मुर्गी और मत्स्य पालन को सशक्त करने के ठोस प्रावधान ग्रामीण आजीविका को नया आधार देते हैं। पशु-चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और कुशल…
नीलगाय और जंगली सुअर : खेती और नीति की समस्या
नीलगायों और जंगली सुअरों का फसलों को चौपट करने के लिए खेतों में उतरना एक तरह से कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ का ही नतीजा है। कई इलाकों में वन्यप्राणियों के वन-निवासियों से घातक द्वंद्व भी इसी पद्धति से उपजे हैं। इनसे…
भूमि की बिगड़ती सेहत और किसान
भारत में भूमि क्षरण अब एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। अत्यधिक कृषि गतिविधियाँ, रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग, शहरीकरण, औद्योगीकरण और जल संसाधनों का असंतुलित दोहन देश की 30 प्रतिशत से अधिक भूमि की सेहत बिगाड़…
16 जनवरी को बीज, बिजली और श्रम विधेयकों के विरोध में गाँव-गाँव ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने का ऐलान
नईदिल्ली, 22 दिसंबर। बीज विधेयक 2025, विद्युत विधेयक 2025, गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAMG अधिनियम 2025), चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने, सभी फसलों के लिए MSP@C2+50 प्रतिशत (गारंटीकृत खरीद सहित) का कानून बनाने और व्यापक कर्ज…
कृषि : खतरे में खेती
भारत-अमरीका के बीच जारी व्यापारिक बातचीत में एक अडंगा ‘जीन संवर्धित’ (जीएम) अमरीकी मक्का और सोयाबीन को भारत में खपाना भी है। यदि इस समझौते को मंजूरी मिल जाती है तो हमारी खेती को अपने समाज और उससे जुड़े सचराचर…
खेती : ट्रैक्टर मालिकों के सामने नई चुनौतियाँ
घटते चारागाह, बढ़ती बहु-फसली खेती और घटती पशुओं की साज-संभाल ने बैलों को अब ट्रैक्टरों से विस्थापित कर दिया है, लेकिन ट्रैक्टरों के भी अपने संकट हैं। मसलन – ट्रैक्टरों को वाहनों का दर्जा दिया जाना, जिसके चलते उन पर…
विश्व खाद्य दिवस : खाली थालियाँ, भरे गोदाम: कैसी यह दुनिया हमारी?
जब दुनिया तकनीकी तरक्की पर गर्व कर रही है, तब भी करोड़ों लोग भूख से जूझ रहे हैं। हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि विकास का असली मापदंड पेट भर…
कृषि : खेतों में महिलाओं का अदृश्य श्रम और मान्यता की लड़ाई
National Women Farmers Day इस तथ्य की याद दिलाता है कि खेतों में बीज से लेकर फसल तक का अधिकांश कार्य महिलाएं करती हैं, परंतु पहचान और नीति में वे अब भी हाशिए पर हैं। झाबुआ जैसे इलाकों में उनके…








