विचार

विनाश को विस्तार देते युद्ध !

आजकल दुनियाभर में जारी युद्धों की अमानवीय क्रूरता, वीभत्स हिंसा और असंख्य मौतों के नतीजे में आखिर क्या मिलता है? दवाओं जैसी अकूत पूंजी कूटते, हथियारों के सौदागरों की कमाई के अलावा इनसे किसी पक्ष को, किसी तरह की कोई…

मूल्यविहीन विदेश नीति : ‘ईमां मुझे रोके है तो खींचे है मुझे कुफ्र’

अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए दुनियाभर में अमन-चैन बरकरार रखने की खातिर बनाई और अमल में लाई जाने वाली विदेश नीतियों के दिन, लगता है, लद गए हैं। आजकल सभी देश अपने-अपने निजी और अक्सर व्यक्तिगत पूंजी के स्वार्थों…

अर्थ व्‍यवस्‍था : बैंकों की बदनीयत

लोक-कल्याणकारी राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐसे काम करें जो जनहित में, बिना शुल्क के हों। बैंकों का गठन भी सेवा के इसी भरोसे के साथ किया गया था, लेकिन आजकल वे खुलकर धंधे में लगे हैं।…

विकास की राह में बढ़ती जनसंख्या की चुनौती

विश्व जनसंख्या दिवस केवल आंकड़ों और योजनाओं की समीक्षा भर नहीं, बल्कि समाज की सोच, नीति-निर्माण और सामाजिक समावेशन का आईना है। भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है — यह उपलब्धि नहीं, चेतावनी है। यह…

विवाह रिश्तों का द्वैत : सामाजिक बंधन या व्यक्तिगत आजादी

आजकल अखबार स्त्री-पुरुष संबंधों के टूटने, अक्सर हिंसक हो जाने और नतीजे में किसी एक या दोनों की मृत्यु की खबरों से अटे पड़े रहते हैं। क्यों हो रहा है, ऐसा? समाज में स्त्री की घटती हैसियत और पितृ-सत्ता के…

रोजगार और व्यवसाय : ‘स्टार्टअप्स’ के लिए जरूरी है, समझ की तब्दीली

रोजगार और व्यवसाय को बढ़ाने के लिए एक तजबीज आई है – स्टार्टअप, लेकिन उन्हें परवान चढाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। मसलन – स्टार्टअप को कारगर बनाने के लिए गंभीरता से किया गया शोध। तैयारी की…

वरिष्‍ठ पत्रकार, लेखक हृदयेश जोशी ने कहा– लोगों को बचाए बिना नहीं बच सकता पर्यावरण

विश्व पर्यावरण दिवस पर स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. के संवाद कार्यक्रम में व्याख्‍यान इंदौर, 5 जून। “अगर आप पर्यावरण को बचाना चाहते हैं, तो सबसे पहले लोगों को बचाना होगा। जन बचेगा तो जंगल बचेगा और जंगल बचेगा तो वन्य…

हमारा बूढ़ा होता नेतृत्व कितना बीमार है कैसे पता चलेगा ?

देश की युवा आबादी के उलट, सत्ता पर क़ाबिज़ बुज़ुर्ग नेतृत्व न केवल औसतन बीमारियों की चपेट में है, बल्कि उनकी असल स्वास्थ्य स्थिति लौह सुरक्षा और चुप्पी के पर्दे में छिपी रहती है। क्या एक बीमार नेतृत्व एक संकटग्रस्त…

भारत-पाकिस्तान तीन दिन का युद्ध : न तीन के,  न 13 के !  

भारत-पाकिस्तान की तीन-दिनी झड़प से और कुछ हुआ, न हुआ हो,आजकल की सरकारों की पोल जरूर खुल गई है। सर्वशक्तिमान डोनॉल्ड ट्रंप से लगाकर चीन, रूस, तुर्किए और युद्धरत भारत व पाकिस्तान की सरकारें कुल-जमा तीन दिन की झड़प में…

जब हमें नागरिकता की जिम्मेदारी का बोध होगा तब आएगा देश में लोकतंत्र

अभ्यास मंडल की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर जगदीप झोकर का संबोधन इंदौर, 16 मई। आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व डायरेक्टर जगदीप झोकर ने कहा है कि जब हमारे देश के नागरिकों को नागरिक होने की जिम्मेदारी का…