ग्लोबल वार्मिंग की गिरफ्त में पृथ्वी धरती आज केवल गर्म नहीं हो रही, बल्कि मानवीय लालसाओं के कारण भीतर ही भीतर धधक रही है। हर वर्ष मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस हमें इस गंभीर पर्यावरणीय संकट की याद दिलाता है,…
पृथ्वी दिवस अब उत्सव नहीं, चेतावनी बन चुका है। जल संकट गहराता जा रहा है, नदियां सूख रही हैं, पहाड़ उजड़ रहे हैं और शहरीकरण प्रकृति का संतुलन बिगाड़ रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का…
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार प्रतीत होने वाला अरावली संबंधी सरकारी एफिडेविट भविष्य के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है। इसमें न प्रकृति की समझ झलकती है, न सांस्कृतिक दृष्टि। संवैधानिक दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण प्रतिबद्धताओं की अनदेखी से पहाड़ों का…
जीते-जागते इंसानों, सभ्यताओं, प्राणियों और स्व-निर्मित संसाधनों को नेस्तनाबूद करने के अलावा युद्ध पर्यावरण का भी विनाश करते हैं। विडंबना यह है कि पर्यावरण की यह बरबादी सदियों वापस पटरी पर नहीं आ पाती। क्या होता है, यह नुकसान? इसकी…
व्यावसायिक एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य अभियान को देश भर में समर्थन 08 अप्रैल। जन स्वास्थ्य अभियान भारत (जेएसएआई) ने अपने राज्य इकाइयों और संबद्ध संगठनों के साथ मिलकर 1 से 7 अप्रैल तक व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर एक सप्ताह राष्ट्रीय…
उदयपुर। भारत और दुनिया से आए विशेषज्ञ एवं पर्यावरण चिंतक अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के साझा संकल्प के साथ उदयपुर में एकत्र हुए। 7–8 फरवरी को जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव, चौथे…
अरावली पर्वतमाला में बढ़ते उत्खनन और वन क्षरण के बीच पड़ी 12 बड़ी दरारों ने मरुस्थलीकरण के खतरे को गंभीर बना दिया है। उपग्रह अध्ययनों पर आधारित सरकारी रिपोर्ट संकेत देती है कि इन कमजोर हिस्सों से थार की रेत…
उदयपुर में चतुर्थ विश्व जल सम्मेलन में अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं कृषि पर विमर्श रिपोर्ट पुनीत कुमार उदयपुर, 7 फरवरी। जनार्दन राय नगर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर में आयोजित चतुर्थ विश्व जल सम्मेलन के प्रथम दिवस पर देश विदेश…
केंद्रीय बजट 2026–27 में रेयर अर्थ को रणनीतिक और सुरक्षा ज़रूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसके साथ ही देश की पर्वतमालाओं, विशेषकर अरावली, पर नए खनन दबाव की आशंका भी गहराती दिख रही है। पर्यावरणविदों और स्थानीय…
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के दुख दूबरे होते दुनिया के अमीर देश गाहे-ब-गाहे मिल-बैठकर अपनी चिंताएं उजागर करते रहते हैं, लेकिन उनकी इस कवायद से किसी का कुछ खास बनता-बिगड़ता नहीं है। पिछले साल के अंत में इसी तरह का…