वैश्विक पर्यावरण

सत्याग्रह से बापू की विरासत बचेगी

विरासत स्वराज यात्रा सत्याग्रह एक उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य है। बापू ने ‘नमक सत्याग्रह’ साबरमती आश्रम से शुरू किया था; उसे भी आज मिटाया जा रहा है। सादगी, समता, शांति, अहिंसामय द्वारा ‘हिंसक सत्ता से सत्य के लिए आग्रह’ करना ही…

साढ़े तीन दशक बाद भी नहीं हो पाया है भोपाल गैस त्रासदी के प्रभावों का मूल्यांकन

भोपाल गैस त्रासदी की 37वीं वर्षगांठ पर वक्तव्य भोपाल गैस त्रासदी के 37 साल बाद भी गैस पीड़ितों का एक और वर्ष अनसुलझे मुख्य मुद्दों के बीच बीत गया। जहरीली गैस रिसाव त्रासदी के परिणामस्वरूप कम से कम 25,000 पीड़ितों…

जहरीली खेती से जुड़ा है, ‘भोपाल गैस कांड’

2-3 दिसंबर 1984 : भोपाल गैस त्रासदी के 37 साल लंबे, दुखद और तकलीफ देह 37 साल गुजारने के बाद क्या हम यह कहने लायक हो पाए हैं कि अब कोई दूसरा ‘भोपाल गैस कांड’ नहीं होगा? जहरीले रासायनिक खादों,…

वायु-प्रदूषण की चपेट में बच्चे

हमारे देश में वायु-प्रदूषण के साथ-साथ जल एवं शोर-प्रदूषण तथा कृषि के रसायन भी शिशुओं तथा नवजात को प्रभावित कर रहे हैं। बच्चों को कुपोषण तथा अल्पपोषण की स्थिति इन सभी प्रभावों को ज्यादा गंभीर बना देती है। कुछ प्रयासों…

झुलसती धरती : संवेदनशीलता ही इस धरती को बचा सकती है

हमारे इस्तेमालवादी असंवेदनशील रवैये ने इस धरती का जितना नुकसान किया है, उतना शायद ही किसी आकस्मिक आपदा ने किया हो। गौरतलब है कि महान वैज्ञानिक स्टीवन हॉकिंग इंसान की हिंसक और आक्रामक प्रकृति को ही धरती के विनाश का…

वर्ष 2021 के प्रतिष्ठित “ग्लोबल एनर्जी अवॉर्ड” से तरुण भारत संघ सम्‍मानित

स्‍काटलैंड के ग्लास्गो में हुए 26 वें शिखर सम्‍मेलन (COP -26) में वर्ष 2021 के प्रतिष्ठित “ग्लोबल एनर्जी अवॉर्ड” के लिए तरुण भारत संघ को विजेता के तौर पर चुना गया। यह सम्मान विश्व के सभी देशों में ऐसे संगठनों,…

पर्वों पर पटाखे

दीपावली पर विशेष पहले जिन पटाखों की पूछ-परख पर्व-त्यौहारों पर ही होती थी, आजकल उन्हें आए दिन फोडने के अवसर खोजे जाने लगे हैं। क्या हमारे समाज में इन पटाखों की अहमियत पहले भी ऐसी ही थी? क्या लंका से…

प्रकृति : समुद्री सम्पदा की समाप्ति में लगी जेलीफिश

प्रकृति के साथ इंसानी रिश्तों की बदहाली आए दिन हमें भीषण प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भोगना पडती हैं, लेकिन इंसान इसे कभी सुधारने की कोशिश नहीं करता। करोडों साल के इतिहास में प्रकृति खुद अपने को बार-बार समाप्त और…

पहाड़ को क्रांक्रीट का नहीं, अपने नैसर्गिक स्वरूप का विकास चाहिए

यूं तो हमारे देश में विकास की मौजूदा अवधारणा कहीं भी कारगर होती दिखाई नहीं देती, लेकिन पहाड़ों, खासकर नए और अभी बन ही रहे हिमालय पर इस विकास की व्यापक मार तेजी से दिखाई दे रही है। पिछले कुछ…

सत्ताधीश बापू की विरासत को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने का लालच दिखा कर नष्ट करना चाहते है – पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह

विरासत स्वराज यात्रा , सेवाग्राम – साबरमती संदेश यात्रा से जुड़ी 17 अक्टूबर 2021. पर्यावरणविद् एवं पानी वाले बाबा के रूप में ख्‍यात राजेंद्रसिंह के नेतृत्‍व में चल रही विरासत स्‍वराज्‍य यात्रा आज सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा के साथ जुड़…