कला और संस्‍कृति

भगौरिया मेले में उमड़ा जनसैलाब, परंपरा के साथ दिखे राजनीति के रंग

झाबुआ से लौटकर कुमार सिद्धार्थ की रिपोर्ट झाबुआ, 2 मार्च। आदिवासी अंचल का प्रसिद्ध लोकपर्व भगौरिया इस बार झाबुआ के उत्कृष्ट मैदान में पूरे उत्साह, परंपरा और बदलते सामाजिक-राजनीतिक रंगों के साथ देखने को मिला। होली से पहले लगने वाले…

24वां ‘झण्डा ऊँचा रहे हमारा अभियान’ का शुभारंभ 15 जनवरी से, शहर में गूंजेगा राष्ट्रप्रेम का स्वर

देशभक्ति, संस्कृति, पर्यावरण, यातायात और नागरिक बोध को जोड़ते हुए 30 जनवरी तक होंगे दस प्रमुख आयोजन इंदौर, 11 जनवरी। गणतंत्र दिवस को केवल एक दिन का औपचारिक उत्सव न मानकर उसे जनभागीदारी, रचनात्मकता और नागरिक चेतना के महोत्सव में…

पत्रकार एवं लेखक प्रमोद भार्गव को मिलेगा नासिक में विद्योतमा सम्मान

शिवपुरी, 7 जनवरी। मध्‍यप्रदेश के वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार प्रमोद भार्गव को कहानी लेखन के क्षेत्र में “विद्योत्तमा सम्मान” से अलंकृत किया जाएगा। श्री भार्गव को उनका 2024 में प्रकाशित कहानी संग्रह “प्रमोद भार्गव की चुनिंदा कहानियां” पर दिया जाएगा।…

वंदे मातरम की विरासत

अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा के चुनाव ने हमें अचानक ‘वंदेमातरम’ के डेढ़ सौवें वर्ष की याद दिला दी है, लेकिन इस तात्कालिक जरूरत के बावजूद ‘वंदेमातरम’ हमारे बेहद गौरवशाली अतीत को उजागर कर देता है। अरविंद जयतिलक भारत ‘वंदेमातरम’ गीत…

रामध्वज का प्रतीक वृक्ष : कोविदार या कचनार?

राम मंदिर पर स्थापित केसरिया ध्वज ने कोविदार वृक्ष के प्रतीक और उसकी प्राचीन परंपरा को फिर केंद्र में ला दिया है। रघुकुल के ध्वज से जुड़े इस वृक्ष को लेकर कचनार-कोविदार की पहचान, आयुर्वेदिक मतभेद और वैज्ञानिक अध्ययनों ने…

डिजिटल शोहरत के पीछे छिपी त्रासदी : बच्चों की सुरक्षा बनाम मुनाफ़ा

राज्यसभा में सुधा मूर्ति की आवाज़ ने उस सच्चाई को उजागर कर दिया, जिसे समाज लंबे समय से टालता आ रहा था—डिजिटल दुनिया बच्चों के बचपन को निगल रही है। किडफ्लुएंसर संस्कृति की चमक के पीछे शोषण, दबाव, ट्रोलिंग और…

खतरे से ख़ाली नहीं ज़िलों, कस्बों और गांवों में पत्रकारिता

भोपाल में ‘गोलियों के सामने अडिग कलम’ पुस्तक का लोकार्पण भोपाल, 29 नवंबर । माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान परिसर में शुक्रवार को आंचलिक पत्रकारिता पर एक गंभीर विमर्श हुआ।इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार,लेखक और बायोपिक…

हर अल्फ़ाज़ में जादू, हर तर्ज़ में एहसास — यही है उर्दू

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 9 नवंबर: विश्व उर्दू दिवस उर्दू… यह महज़ एक ज़ुबान नहीं, एक रूहानी धड़कन है — जिसमें मोहब्बत की महक है, अदब की नर्मी है, और इंसानियत की गर्माहट है। इस ज़ुबान के लफ़्ज़ होंठों से नहीं, दिल से निकलते हैं — जब कोई “जान-ए-मन” कहता है, तो उसकी आवाज़…

चंद्रकांत देवताले : मनुष्य की गरिमा और प्रतिरोध की कविता

चंद्रकांत देवताले (जन्‍म 7 नवंबर 1936, निधन 14 अगस्‍त 2017) हिंदी कविता के उन कवियों में से थे, जिन्होंने जीवन की भूख, श्रम और पीड़ा को अलंकारों के बिना, सधे और सधे हुए शब्दों में कहा। उनकी कविता मनुष्य की…

इंदौर में सजेगा शब्दों और सुरों का रंगमंच : 11वां लिटरेचर फेस्टिवल 14 से 16 नवंबर तक

इंदौर, 2 नवबंर। साहित्य,  कला और संस्कृति के सबसे जीवंत और चमकदार उत्सव “इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल” का 11वां सीजन आगामी 14-15-16 नवंबर को होने जा रहा है। अपने स्तरीय आयोजनों से यह फेस्टिवल देश ही नहीं दुनिया भर में इंदौर…