मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी
हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर…
युद्ध का यशोगान : रक्षा बजट की दौड़ में उलझती दुनिया
कुछ लोग पूछते हैं कि ट्रंप की आक्रामक नीतियों पर दुनिया चुप क्यों है। कारण साफ है—जब शक्ति के साथ हथियार और आर्थिक प्रभुत्व जुड़ जाए, तो विरोध जोखिम बन जाता है। अमेरिका के बढ़ते रक्षा बजट, तकनीकी बढ़त और…
स्वास्थ्य बजट : बढ़ता आवंटन, घटती जवाबदेही
हमेशा की तरह इस बार भी हमने अपने बजट में वे ही कारनामे किए हैं जिनके चलते स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्र साल-दर-साल फिसड्डी होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य में हमने पिछले सालों की तरह एक तरफ, भारी-भरकम आवंटित…
राष्ट्रमाता कस्तूरबा : तप, त्याग, सेवा और मातृत्व की मूर्ति
भारत की स्वतंत्रता गाथा में कस्तूरबा गांधी का नाम त्याग और तपस्या की अमर मिसाल है। 22 फरवरी 1944 को अंग्रेजों की कैद में उन्होंने प्राण त्यागे, लेकिन उनका संघर्ष, सादगी और सेवा भाव आज भी प्रेरणा देता है। राष्ट्र…
वैश्विक समझौतों की बिसात पर छोटे पशुपालक
भारत सरीखे कृषि प्रधान देश में वैश्विक व्यापार समझौतों का सीधा असर कृषि और किसानों पर होता है। वैसे भी हमारे यहां कृषि और पशुपालन, प्राथमिक रूप से व्यापार की बजाए पेट भरने की तकनीक मानी जाती है और ऐसे…
खेती को खतरे में धकेलते व्यापार समझौते और कानून
पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने ‘यूरोपियन संघ’ और अमरीका के साथ दो अलग-अलग व्यापार समझौते किए हैं। इन दोनों समझौतों में ‘यूरोपियन संघ’ के 27 देशों और अमरीका के भारी-भरकम सब्सीडी वाले कृषि उत्पादों को भारत में खपाने की…
सोलर प्रोजेक्ट बनाम खेजड़ी : राजस्थान में संरक्षण की निर्णायक लड़ाई
राजस्थान में इन दिनों राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर बड़ा जन-आंदोलन उभरकर सामने आया है। बीकानेर और आसपास के क्षेत्रों में सोलर पावर परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कथित कटाई के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे…
परीक्षा का डर नहीं, आत्मविश्वास का उत्सव मनाएं
आज परीक्षा केवल पाठ्यक्रम की नहीं, बच्चों के मनोबल की भी परीक्षा बनती जा रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, अपेक्षाएँ और तुलना का दबाव छात्रों में डर और असुरक्षा पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सहयोगी माहौल, पर्याप्त विश्राम…
डॉ. एस. एन. सुब्बराव : श्रमसंस्कार, सेवा व मानवीय मूल्यों का प्रेरणा पुंज व्यक्तित्व
युवाओं को सेवा, श्रम और राष्ट्रभाव से जोड़ने वाले प्रख्यात गांधीवादी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ का जीवन स्वयं एक चलता-फिरता संदेश था। सीमित साधनों में उन्होंने देशभर में युवा चेतना की मशाल जलाई और गांधी विचार को व्यवहार में उतारा।…
7 फरवरी जयंती : राष्ट्र-भक्ति और गांधीवादी मूल्यों के प्रतीक एस. एन. सुब्बराव
प्रख्यात गांधीवादी और सर्वोदयी नेता डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाईजी’ युवाओं को यही जीवन-दृष्टि सिखाते थे कि हर छोटा कार्य भी देश और समाज से जुड़ सकता है। उनकी 97वीं जयंती पर सेवा, अहिंसा, सद्भाव और चरित्र-निर्माण के उनके जीवंत संदेश…









