क्या लुप्त हो जाएंगे उज्जैन के पौराणिक सप्तसागर ?
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित पौराणिक सप्तसागर धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अद्वितीय हैं, लेकिन आज ये गंभीर उपेक्षा और अतिक्रमण का शिकार हैं। अवैध कब्जों और गंदे पानी के कारण इन जलाशयों का अस्तित्व संकट में है। हाल…
Let’s Kill Gandhi : गांधी की हत्या, सच की हत्या और स्मृति की राजनीति
गांधी निर्वाण दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास से सामना करने की जिम्मेदारी भी है। तुषार गांधी की पुस्तक “Let’s Kill Gandhi” उस सच को उजागर करती है, जिसे वर्षों से ढका गया। यह बताती है कि गांधी…
गांधी पुण्यतिथि 30 जनवरी : गांधी से सीखने के युवा शिविर
किसी विचार को सीखने, समझने के लिए शिविर और संभाषण बेहतरीन माध्यम होते हैं। गांधी विचार को सीखने, समझने के लिए भी नारायण भाई देसाई और डॉ. एसएन सुब्बराव ने इन्हीं पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल किया था। क्या होता था,…
गिग वर्कर्स : दस मिनट में डिलीवरी का अंत
दस मिनट में कोई सामान आप तक पहुंचाने वाले डिलीवरी बॉय या ‘गिग वर्कर्स’ लगभग हर शहर में बगटूट भागते, अपनी मोटर साइकलें दौड़ाते आपको दिख जाएंगे। क्या उनकी इस बदहवासी में सिर्फ कमाई का प्रोत्साहन भर रहता है? या…
बढ़ते शहरीकरण में पिछड़ता कचरा प्रबंधन
देश के दस लाख आबादी से अधिक के शहरों में इंदौर को स्वच्छता में अव्वल माना गया है, लेकिन हाल में उसी इंदौर में प्रदूषित पानी पीकर दस लोगों को अपनी जान गंवाना पड़ी और करीब 150 लोग बीमार हुए…
इंदौर : विकास और बुनियादी ज़रूरतों के बीच संकट
स्वच्छता का सिरमौर कहलाने वाला, विकास और समृद्धि की चमक में डूबा इंदौर आज एक भयावह विडंबना से गुजर रहा है। जहाँ मेट्रो, फ़्लाईओवर और करोड़ों के समारोह हैं, वहीं लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। भागीरथपुरा की त्रासदी…
वेनेज़ुएला पर साम्राज्यवादी आक्रमण : युद्ध, वर्चस्व और विश्व शांति का संकट
वेनेज़ुएला के निर्वाचित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में साम्राज्यवादी हस्तक्षेप की खतरनाक मिसाल है। यह केवल वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर हमला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और संप्रभु समानता की पूरी व्यवस्था को…
वंदे मातरम की विरासत
अगले साल होने वाले बंगाल विधानसभा के चुनाव ने हमें अचानक ‘वंदेमातरम’ के डेढ़ सौवें वर्ष की याद दिला दी है, लेकिन इस तात्कालिक जरूरत के बावजूद ‘वंदेमातरम’ हमारे बेहद गौरवशाली अतीत को उजागर कर देता है। अरविंद जयतिलक भारत ‘वंदेमातरम’ गीत…
स्मृति शेष : संज्ञा की बजाय क्रिया के अनुपम
अनुपम मिश्र को शरीर छोड़े एक दशक हो रहा है, लेकिन पानी और पर्यावरण पर मंडराते संकटों में उनकी चेतावनी आज और तेज़ सुनाई देती है। उन्होंने बार-बार बताया कि जल की कमी प्रकृति की नहीं, समाज की असंवेदनशीलता की…
एक थे अनुपम मिश्र, सचमुच के अनुपम
अनुपम मिश्र को हमसे विदा हुए नौ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन पानी, पर्यावरण और सादगी को लेकर उनकी दृष्टि आज भी उतनी ही जीवित है। ऐसे समय में, जब विकास पर्यावरण पर भारी पड़ रहा है, अनुपम मिश्र का…









