धर्मांध भीड को अपने कर्मकांडों की खातिर ज्यादा जगह की जरूरत होती है और इस तर्क पर आजकल देशभर के प्राचीन धार्मिक स्थलों को भव्य ‘लोक’ में तब्दील करके उन्हें विस्तार दिया जा रहा है। अयोध्या, बनारस, प्रयागराज, उज्जैन आदि…
धीरेन्द्र मजूमदार भारतीय रचनात्मक आंदोलन के उन तेजस्वी व्यक्तित्वों में थे, जिनमें विचार की पारदर्शिता और कर्म की प्रतिबद्धता अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रवाहित होती थी। धीरेन्द्रदा के नाम से पहचाने जाने वाले इस गांधीवादी कार्यकर्ता ने साधना, सेवा और…
जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे, जबकि उपभोक्तावादी जीवनशैली ग्रीनहाउस गैसों को और बढ़ा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार पादप-आधारित आहार अपनाना उत्सर्जन घटाने का प्रभावी तरीका है। पेड़–पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थ…
भारत-अमरीका के बीच जारी व्यापारिक बातचीत में एक अडंगा ‘जीन संवर्धित’ (जीएम) अमरीकी मक्का और सोयाबीन को भारत में खपाना भी है। यदि इस समझौते को मंजूरी मिल जाती है तो हमारी खेती को अपने समाज और उससे जुड़े सचराचर…
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार के इतिहास में आचार्य विनोबा भावे का व्यक्तित्व अद्वितीय और प्रेरक रहा है। गांधीजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले विनोबा ने अहिंसा, सेवा और आत्मनिर्भरता को जीवन का आधार बनाया। भूदान आंदोलन, सर्वोदय…
बच्चों के प्रति अपने स्नेह और विश्वास के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू भारतीय बाल-चेतना के सबसे बड़े संरक्षक माने जाते हैं। उनके जन्मदिवस 14 नवम्बर का ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाना इसी भावना का प्रतीक है। नेहरू का…
पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे प्रखर नायक थे जिन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक नींव, औद्योगिक आधार और वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया। विश्वशांति, गुटनिरपेक्षता और…
प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 9 नवंबर: विश्व उर्दू दिवस उर्दू… यह महज़ एक ज़ुबान नहीं, एक रूहानी धड़कन है — जिसमें मोहब्बत की महक है, अदब की नर्मी है, और इंसानियत की गर्माहट है। इस ज़ुबान के लफ़्ज़ होंठों से नहीं, दिल से निकलते हैं — जब कोई “जान-ए-मन” कहता है, तो उसकी आवाज़…
हर वर्ष 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि कैंसर भारत सहित विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार भारत में जीवनभर में 11 प्रतिशत लोगों…
बिहार की राजनीति में अपराध, जाति और सत्ता का त्रिकोण लंबे समय से प्रभावी रहा है। “जंगल राज” सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और वर्चस्व के संघर्ष की परतों से जुड़ा शब्द रहा है। आज जब युवा…