Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

सप्रेस फीचर्स

पर्यावरण और स्वास्थ्य की राह : क्यों जरूरी है वनस्पति-आधारित आहार?

जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे, जबकि उपभोक्तावादी जीवनशैली ग्रीनहाउस गैसों को और बढ़ा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार पादप-आधारित आहार अपनाना उत्सर्जन घटाने का प्रभावी तरीका है। पेड़–पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थ…

कृषि : खतरे में खेती

भारत-अमरीका के बीच जारी व्यापारिक बातचीत में एक अडंगा ‘जीन संवर्धित’ (जीएम) अमरीकी मक्का और सोयाबीन को भारत में खपाना भी है। यदि इस समझौते को मंजूरी मिल जाती है तो हमारी खेती को अपने समाज और उससे जुड़े सचराचर…

गांधी दर्शन और विचार शख्सियत

आचार्य विनोबा भावे: अहिंसा, सेवा और सामाजिक न्याय की शाश्वत दृष्टि

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार के इतिहास में आचार्य विनोबा भावे का व्यक्तित्व अद्वितीय और प्रेरक रहा है। गांधीजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले विनोबा ने अहिंसा, सेवा और आत्मनिर्भरता को जीवन का आधार बनाया। भूदान आंदोलन, सर्वोदय…

बच्चों की हंसी में ही बसता है भारत का भविष्य

बच्चों के प्रति अपने स्नेह और विश्वास के कारण पंडित जवाहरलाल नेहरू भारतीय बाल-चेतना के सबसे बड़े संरक्षक माने जाते हैं। उनके जन्मदिवस 14 नवम्बर का ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाना इसी भावना का प्रतीक है। नेहरू का…

जवाहरलाल नेहरू का भारत : आजादी, लोकतंत्र और विश्वबंधुत्व का सफर

पंडित जवाहरलाल नेहरु भारत के स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे प्रखर नायक थे जिन्होंने न केवल आजादी की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक नींव, औद्योगिक आधार और वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया। विश्वशांति, गुटनिरपेक्षता और…

हर अल्फ़ाज़ में जादू, हर तर्ज़ में एहसास — यही है उर्दू

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” 9 नवंबर: विश्व उर्दू दिवस उर्दू… यह महज़ एक ज़ुबान नहीं, एक रूहानी धड़कन है — जिसमें मोहब्बत की महक है, अदब की नर्मी है, और इंसानियत की गर्माहट है। इस ज़ुबान के लफ़्ज़ होंठों से नहीं, दिल से निकलते हैं — जब कोई “जान-ए-मन” कहता है, तो उसकी आवाज़…

कैंसर से बचाव के लिए जागरुकता की जरुरत                 

हर वर्ष 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि कैंसर भारत सहित विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक बन चुका है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार भारत में जीवनभर में 11 प्रतिशत लोगों…

बिहार चुनाव : जंगल राज बनाम सरकारी नौकरी की बौछार

बिहार की राजनीति में अपराध, जाति और सत्ता का त्रिकोण लंबे समय से प्रभावी रहा है। “जंगल राज” सिर्फ कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और वर्चस्व के संघर्ष की परतों से जुड़ा शब्द रहा है। आज जब युवा…

मछुआरा महिलाओं का संघर्ष : सवाल जो अब भी अनसुने हैं

विश्व मछुआरा महिला दिवस पर सवाल यही है कि मछुआरा महिलाओं का नेतृत्व, उनकी आवाज़ और उनके संघर्ष आज भी मुख्यधारा के महिला आंदोलनों में जगह क्यों नहीं पाते? समुद्र किनारे खड़ी ये महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं, जाति, श्रम और…

‘स्मार्ट सिटी योजना’ : पूंजी के लिए ‘प्राइवेट पार्टनर’

कुल जमा दस मिनट की बरसात में बाढग्रस्त हो जाने वाले, जल-मल निकासी के बजबजाते गटरों, टूटी-फूटी सडकों और बदहाल जलापूर्ति आदि से बदहवास शहरों को दस साल पहले स्मार्ट बनाने के मंसूबे बांधे गए थे। आज इस कारनामे को…