सप्रेस फीचर्स

मछुआरा महिलाओं का संघर्ष : सवाल जो अब भी अनसुने हैं

विश्व मछुआरा महिला दिवस पर सवाल यही है कि मछुआरा महिलाओं का नेतृत्व, उनकी आवाज़ और उनके संघर्ष आज भी मुख्यधारा के महिला आंदोलनों में जगह क्यों नहीं पाते? समुद्र किनारे खड़ी ये महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं, जाति, श्रम और…

‘स्मार्ट सिटी योजना’ : पूंजी के लिए ‘प्राइवेट पार्टनर’

कुल जमा दस मिनट की बरसात में बाढग्रस्त हो जाने वाले, जल-मल निकासी के बजबजाते गटरों, टूटी-फूटी सडकों और बदहाल जलापूर्ति आदि से बदहवास शहरों को दस साल पहले स्मार्ट बनाने के मंसूबे बांधे गए थे। आज इस कारनामे को…

‘चिप’ का चमत्कार : सेमीकंडक्टर में स्वावलंबी होता भारत

यह विज्ञान का चमत्कार ही है कि आधुनिक जीवन की अधिकांश सुविधाएं एक मामूली-सी ‘सेमीकंडक्टर चिप’ में समाहित हो गई हैं। आज की दुनिया में इसी ‘चिप’ को हासिल करने, बनाने की होड मची है। अपना देश भी इस दिशा…

कुमार अम्बुज : कविता जीवन पर निर्बल की सच्ची पकड़ है

कुमार अम्बुज की कविताएँ हमारे समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और उम्मीदों की साक्षी हैं। हाल ही में कुसुमाग्रज सम्मान से सम्मानित अम्बुज ने अपने लेखन से यह सिद्ध किया है कि कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज के…

गांधी अध्‍येता, शांति की रचनाकार, समाज की साधिका : निर्मला देशपांडे

निर्मला देशपांडे—एक साधारण सी दिखने वाली असाधारण स्त्री, जिन्होंने खादी पहनकर हिंसा की आग में भी शांति के फूल बोए। भूदान से लेकर कश्मीर और गुजरात तक, वे जहां गईं, करुणा, संवाद और समर्पण की मिसाल बन गईं। उनकी जयंती…

दीपावली : रोशनी का नहीं, रिश्तों और जिम्मेदारी का पर्व

दीपावली केवल रोशनी और उत्सव का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक बंधन और मानवीय संवेदनाओं का पर्व है। यह त्योहार न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, बल्कि समाज में सद्भाव, समानता और सहयोग की भावना को…

दीपावली : रोशनी घर में नहीं, दिलों में भी फैलाएं

दिवाली रोशनी का नहीं, संवेदनाओं का भी त्योहार है — वह जो भीतर के अंधकार को मिटा सके। आज जब कृत्रिम उजालों में रिश्तों की ऊष्मा खोती जा रही है, जरूरत है कि हम अपने भीतर करुणा, प्रेम और अपनापन…

खेती : ट्रैक्टर मालिकों के सामने नई चुनौतियाँ

घटते चारागाह, बढ़ती बहु-फसली खेती और घटती पशुओं की साज-संभाल ने बैलों को अब ट्रैक्टरों से विस्थापित कर दिया है, लेकिन ट्रैक्टरों के भी अपने संकट हैं। मसलन – ट्रैक्टरों को वाहनों का दर्जा दिया जाना, जिसके चलते उन पर…

विश्व खाद्य दिवस : खाली थालियाँ, भरे गोदाम: कैसी यह दुनिया हमारी?

जब दुनिया तकनीकी तरक्‍की पर गर्व कर रही है, तब भी करोड़ों लोग भूख से जूझ रहे हैं। हर साल 16 अक्‍टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि विकास का असली मापदंड पेट भर…

भूख के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता एवं संकल्प का दिन

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 16 अक्टूबर को World Food Day का आयोजन किया जाता है। 150 से अधिक देशों में सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों, स्कूल, कालेज एवं विश्वविद्यालयों द्वारा विश्व खाद्य दिवस के वार्षिक केंद्रीय विषय आधारित विविध कार्यक्रम आयोजित कर भूख…