सप्रेस फीचर्स

कृषि : खेतों में महिलाओं का अदृश्य श्रम और मान्यता की लड़ाई

National Women Farmers Day इस तथ्य की याद दिलाता है कि खेतों में बीज से लेकर फसल तक का अधिकांश कार्य महिलाएं करती हैं, परंतु पहचान और नीति में वे अब भी हाशिए पर हैं। झाबुआ जैसे इलाकों में उनके…

संकटों से जूझती, उम्मीदों को गढ़ती, दुनिया को नया आकार देती बालिकाएं

11 अक्टूबर, अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस केवल एक तिथि नहीं, बल्कि हर उस लड़की के साहस और संकल्प का प्रतीक है जो अपनी पहचान स्वयं गढ़ रही है। वर्ष 2025 की थीम — “मैं जो लड़की हूं, मैं जो बदलाव लाती…

कितने समावेशी, सुगम, सांस लेने लायक और लोकतांत्रिक बचे हैं, ‘स्मार्ट सिटीज़’

हमारे समय की विकास योजनाओं की त्रासदी है कि वे आस-पड़ौस के संसाधनों और समाज को तरजीह दिए बिना खड़ी की जाती हैं। ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ भी इससे हटकर नहीं है। करीब दस साल पहले बड़े धूम-धडाकों के साथ उतारी…

क्रांति गौंड : गांव की गली से वर्ल्ड कप क्रिकेट तक

बुंदेलखंड की वीर भूमि ने एक बार फिर अपनी बेटी के साहस से इतिहास लिखा है। घुवारा की क्रांति गौंड ने गरीबी, तानों और अभावों को मात देकर क्रिकेट के मैदान पर भारत का नाम रोशन किया। जिसने कभी फटे…

लद्दाख की लहर : स्वायत्तता मांगते सोनम वांगचुक

छह साल पहले धारा 370 के हटने और लद्दाख को ‘केन्द्र शासित प्रदेश’ बनाए जाने से जो लोग मोदी सरकार के गुण गा रहे थे, वे अब अचानक उसी मोदी सरकार की नाराजी का शिकार बन रहे हैं। केन्द्र सरकार…

गांधीजी का महात्मा प्रबंधकीय कौशल

प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को गांधी के आंदोलनों, खासकर उनकी तैयारी के संदर्भ में देखें तो बहुत स्पष्ट रूप से उनका अमल दिखाई देता है। इस लिहाज से गांधी उस प्रबंधन के कारगर गुरु माने जा सकते हैं जिसे अनेक…

गांधी विचार : वैश्विक संकटों का समाधान

महापुरुषों की जयंती अक्सर उनके गुणगान तक सीमित रह जाती है, लेकिन आज की वैश्विक चुनौतियाँ—अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध, जलवायु संकट और बढ़ते हिंसक संघर्ष—यह साफ़ करती हैं कि गांधी विचारों की अनदेखी संभव नहीं। उनका दर्शन केवल स्वतंत्रता आंदोलन का…

एक कदम गांधी के साथ : संविधान, लोकतंत्र और इंसानियत की सहयात्रा

सर्व सेवा संघ ने सहमना संगठनों और सहयोगियों के साथ राजघाट, वाराणसी से दिल्ली तक संविधान मार्च की पदयात्रा की घोषणा की है। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) से शुरू होकर संविधान दिवस (26 नवंबर) को जंतर-मंतर पर संपन्न होने वाली…

ओडिशा : सौ साल पहले ओडिशा में महात्मा गांधी

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष के साथ-साथ समाज सुधार और आत्मनिर्भरता की अलख जगाने वाले महात्मा गांधी का ओड़िशा प्रवास स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक अध्याय बन गया। 1921 और 1925 में कटक में हुए उनके प्रवास ने खादी, चरखे और…

कितने कारगर हैं लोकतंत्र, मार्क्सवाद और धर्म ?

उम्र के नौ दशक से अधिक वर्ष पार कर चुके पत्रकार, कॉमरेड एलएस हरदेनिया ने अपने इस लेख में विचार, खासकर अनूठे विचारों की जरूरत और मौजूदा समय की कमजोरियों पर उंगली रखी है। वे पूछते हैं कि बीसवीं, इक्कीसवीं…