सप्रेस फीचर्स

जीवन शैली : मोटापे की मार

तीसरी दुनिया के देशों में भूख और कुपोषण सर्वाधिक चर्चा में रहते हैं, लेकिन कथित आधुनिक जीवन-शैली के चलते जरूरत से ज्यादा भोजन भी आजकल संकट पैदा करने लगा है। क्या होते हैं, इसके नतीजे? डॉ. नमिता शर्मा मोटापा, स्थूलता, ओबेसिटी यानि…

हिन्दी दिवस : विश्व की सबसे समृद्ध भाषा है हिन्दी

हिन्दी, जो संस्कृत से विकसित होकर देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, भारत की राजभाषा और विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह न केवल जनभाषा के रूप में लोगों को जोड़ती है बल्कि हमारी संस्कृति,…

विचार : भविष्य में युवा राष्ट्र से कहीं बूढ़ा भारत न बने!

देश की जनसंख्या को लेकर कोई भी टिप्पणी प्रतिक्रिया की वजह बनती है। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार को तीन बच्चे पैदा करना चाहिए। इसके पीछे भी उन्होंने एक कारण बताया। संभव है…

विनोबा जयंती : सरकार नियामत नहीं बरसाती

विनोबा भावे की जयंती हमें याद दिलाती है कि सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर सेवा ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। उनका विचार था कि गांव का भला गांव के लोगों के हाथ में है, न कि केवल सरकार…

भारत–ब्राजील की साझा पहल से जलवायु न्याय को नई दिशा मिल सकती है

नई दिल्ली में कोप 30 की तैयारी बैठक में राजेंद्र सिंह और कैलाश सत्यार्थी समेत कई गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 1 सितंबर 2025 को ब्राजील कोप 30 (COP30) की तैयारी बैठक आयोजित हुई। इसमें भारत…

” जब फिल्म ‘गांधी’ मनीला में प्रदर्शित हुई..”

एक संस्मरण:  बयालीस साल पहले हाल ही में 29 अगस्त को “गांधी” फिल्म के निर्देशक एटनबरो की पुण्यतिथि थी। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें याद करते हुए “गांधी” फिल्म की श्रेष्ठता का वर्णन किया है। तानाशाही के विरोध…

कौसानी चाय बागान : किसानों के शोषण की अनसुनी कहानी

विपिन जोशी की रिपोर्ट कौसानी की चाय अपनी अनूठी सुगंध और गुणवत्ता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जो उच्च कीमतों पर बिकती है। लेकिन इस चाय को आपके प्याले तक पहुंचाने वाले गरीब किसानों और श्रमिकों को उनके…

आजादी पर्व : क्‍या बोल के लब आजाद है तेरे?

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक महिलाओं ने साहस, त्याग और नेतृत्व से देश का गौरव बढ़ाया है। रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू से लेकर निर्मला सीतारमण और पीवी सिंधु तक, स्त्रियों ने हर क्षेत्र में अपनी छाप…

आदिवासी जीवन एवं प्रकृति दर्शन : टिकाऊ भविष्य की ओर

हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व आदिवासी दिवस, उन समुदायों के जीवन दर्शन और प्रकृति संग सह-अस्तित्व की अनूठी परंपरा को सम्मानित करने का अवसर है। जंगल, जल और जमीन से गहरे जुड़े आदिवासी समाज का ज्ञान,…

नागासाकी : अनुशासन, मौन और शांति का समवेत स्वर

पिछले साल नवंबर में हमारे द्वारा की गई जापान यात्रा के दौरान जब हम नागासाकी पहुँचे, तो वह पल केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अनुभव बन गया। शांति और विनाश की स्मृतियों से घिरे इस शहर ने हमें…