सप्रेस फीचर्स

युद्धकाल : बूचड़खाने में बदलती दुनिया

महात्मा गांधी कहा करते थे कि यदि ‘आंख के बदले आंख निकाली जाए तो अंत में समूची दुनिया अन्धी हो जाएगी।’ कौन जानता था कि गांधी की विदाई के 77 साल बाद यह बात कहावत से निकलकर कड़वी सच्चाई में…

भारतीय भाषाओं का डिजिटल संरक्षण

तेजी से विलुप्त होती हमारी भाषाओं, बोलियों को बचाने, संरक्षित करने के क्या उपाय हैं? अव्वल तो तरह-तरह के विकासवादी खटकरमों से उस समाज को बचाना होगा जो उन भाषाओं, बोलियों को वापरता है। दूसरे, भाषाओं की ध्वनियों, व्याकरण और…

अर्थ व्‍यवस्‍था : बैंकों की बदनीयत

लोक-कल्याणकारी राज्यों से उम्मीद की जाती है कि वे ऐसे काम करें जो जनहित में, बिना शुल्क के हों। बैंकों का गठन भी सेवा के इसी भरोसे के साथ किया गया था, लेकिन आजकल वे खुलकर धंधे में लगे हैं।…

सदभाव : अमन के लिए आशनाई

हमारे चारों तरफ फैले, फैलाए गए हिन्दू-मुसलमानों के साम्प्रदायिक तनावों में आम नागरिक क्या करे? ऐसा आम नागरिक जो इस फूहड़ता, हिंसा और घमंड़ में शामिल नहीं होना चाहता? एक तरीका है, आशनाई यानि मित्रता, प्यार का जिससे एक-दूसरे को…

जलवायु कार्यकर्ताओं की बढ़ती गिरफ़्तारियाँ और लोकतांत्रिक संकट

क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? लंदन। हाल ही में प्रकाशित पत्रिका द इकोलाजिस्‍ट एवं ग्रीनपीस की एक संयुक्त रिपोर्ट ने ब्रिटेन में जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हो रही गिरफ़्तारियों और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए…

विकास की राह में बढ़ती जनसंख्या की चुनौती

विश्व जनसंख्या दिवस केवल आंकड़ों और योजनाओं की समीक्षा भर नहीं, बल्कि समाज की सोच, नीति-निर्माण और सामाजिक समावेशन का आईना है। भारत विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन चुका है — यह उपलब्धि नहीं, चेतावनी है। यह…

चिकित्सा शिक्षा का अवमूल्यन : राष्ट्र के समक्ष चुनौती

अध्ययन बताते हैं कि दुनियाभर में हथियारों के अलावा दवाओं का धंधा पूंजी कूटने में सर्वाधिक अहमियत रखता है। दवाओं के इस धंधे में चिकित्सा शिक्षा भी हिस्सेदार है, लेकिन इस सबसे आम मरीज और व्यापक समाज पर क्या और…

प्रकृति का पर्यावरण

पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…

वाद्य निर्माण : मिरज में मौजूद है, सितार को ‘जन्म’ देने की परंपरा

सितार समेत तरह-तरह के तार-वाद्यों के निर्माण के लिए विख्यात दक्षिण महाराष्ट्र का शहर मिरज भारतीय शास्त्रीय संगीत का केन्द्र भी है। सितार बनाने वाले शिकलगार, जिन्हें कई जगहों पर अपराधी माना जाता है, डेढ़ सौ साल पहले तक हथियार…

बचपन की यादें समेटती पुस्तक : लौटा मन अतीत की ओर

सुरेश उपाध्‍याय लौटा मन अतीत की ओर’ डा. भोलेश्वर दुबे का वन अलाइन पब्लिकेशन, दिल्ली से प्रकाशित अपनी जन्मस्थली ‘सीतामऊ’ की स्मृतियों पर आधारित आलेख संकलन है। सत्तर के दशक की स्मृतियों को डा. दुबे ने 13 खंडों के माध्यम…