कौसानी चाय बागान : किसानों के शोषण की अनसुनी कहानी

विपिन जोशी की रिपोर्ट

कौसानी की चाय अपनी अनूठी सुगंध और गुणवत्ता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जो उच्च कीमतों पर बिकती है। लेकिन इस चाय को आपके प्याले तक पहुंचाने वाले गरीब किसानों और श्रमिकों को उनके श्रम का उचित लाभ नहीं मिल रहा। अपनी जमीन चाय बोर्ड को लीज पर देने के बाद, ये किसान उसी जमीन पर चाय की पत्तियां तोड़ने और बागान के रखरखाव का काम करते हैं।

चाय बोर्ड के साथ हुए समझौते के अनुसार, श्रमिकों को महीने में 26 दिन काम मिलना चाहिए। हालांकि, किसानों का आरोप है कि हाल के वर्षों में उनके कार्य दिवसों में कटौती की जा रही है। समय पर वेतन भी नहीं मिलता, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। कौसानी के निकट बघरी गांव में सुपरवाइजर बलवंत सिंह किसानों को पूरे 26 दिन का काम देने की कोशिश करते हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में यह व्यवस्था लागू नहीं हो रही।

श्रमिक विनोद ने बताया कि चाय की खेती से उत्तराखंड सरकार को अच्छा मुनाफा हो रहा है, लेकिन चाय बोर्ड के प्रबंधक और कुछ सुपरवाइजरों की मिलीभगत के कारण किसानों का शोषण हो रहा है। बागान में पत्ती तोड़ने के अलावा रखरखाव का काम भी होता है, लेकिन श्रमिकों को आवश्यक उपकरण और रेनकोट तक उपलब्ध नहीं हैं। पूर्व प्रबंधक भानु पांडे ने कुछ समय पहले रेनकोट और उपकरण मुहैया कराए थे, लेकिन अब ये सुविधाएं भी बंद हो चुकी हैं, जिससे काम जोखिम भरा हो गया है।

जिला पंचायत सदस्य बलवंत नेगी ने बताया कि कौसानी के आसपास के गांवों—लौबांज, खालूखेत, सीमा, और गिवाड़—में करीब 250 श्रमिकों की स्थिति दयनीय है। गरीब और दलित वर्ग के काश्तकारों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। कार्य दिवसों में कटौती के साथ-साथ बकाया भुगतान में देरी की शिकायतें भी हैं। नेगी ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे काश्तकारों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

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चाय विकास बोर्ड, कौसानी के प्रबंधक प्रमोद कुमार ने बताया कि बागेश्वर जिले में 745 काश्तकार हैं। अनुबंध के अनुसार, 50 नाली जमीन पर 26 कार्य दिवस और 25 नाली पर 13 कार्य दिवस निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि पारिवारिक बंटवारे के कारण कुछ काश्तकारों की जमीन कम हुई है, जिससे कार्य दिवसों में कमी आई है। इस मुद्दे पर बातचीत में शामिल काश्तकारों में शामिल—जगत राम, प्रमोद कुमार, विनोद, गिरधारी, तेज सिंह बोरा, बसंत बिष्ट, केशव लाल, जीवन सिंह, लाल सिंह, चंपा देवी, दीपा देवी, हंसी देवी, मुन्नी देवी, और पार्वती देवी—ने अपनी समस्याओं को उजागर किया और उचित समाधान की मांग की।

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