Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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कपिला बहन : हमसे तब बिछुड़ी जब उनकी जरुरत ज्यादा है

नर्मदा बचाओ आंदोलन की जुझारु कार्यकर्ता कपिला बहन नहीं रही। उनका निधन 26 अक्‍टूबर 2020 को हो गया। सरदार सरोवर बाँध की केवड़िया कॉलोनी निर्माण से किए गए विस्थापन के खिलाफ वे अंतिम दम तक लड़ती रही जिसमें उनके परिवार…

उनके लिए गांधी और भगत सिंह में भेद नहीं था

गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर विशेष गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्तूबर 1890 को अपनी नानी गंगा देवी के घर अतरसुरैया इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। उनका नाम उनकी नानी ने पहले ही चुन लिया था जब उन्होंने…

जाने-माने साहित्यकार और पत्रकार प्रकाश शाह गुजराती साहित्य परिषद के अध्यक्ष निर्वाचित

एक सौ पंद्रह वर्ष पुरानी गुजराती साहित्य परिषद गुजराती साहित्यकारों की संस्था है, जिसका अपना वैचारिक वजूद है। हाल ही में जाने-माने साहित्यकार और पत्रकार प्रकाश शाह को  गुजराती साहित्य परिषद का अध्यक्ष चुना गया है। श्री शाह  ने वर्षों…

भूख की भयावहता

दुनिया की अमीरी उजागर करने के लिए जिस तरह ‘फोर्ब्‍स’ पत्रिका समेत अन्‍य भांति-भांति की रिपोर्टं प्रकाशित की जाती हैं, ठीक उसी तरह दुनियाभर की भुखमरी उजागर करने की खातिर ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट’ का सालाना प्रकाशन होता है। इस…

व्‍यवसाय के लिए वन

आधुनिक व्‍यापार-व्‍यवसाय ने अब तेजी से प्राकृतिक संसाधनों को अपनी चपेट में लेना शुरु कर दिया है। जंगल, जिन्‍हें सुप्रीमकोर्ट द्वारा दी गई परिभाषा के मुताबिक केवल रिकॉर्ड में जंगल की तरह दर्ज होना ही काफी है, निजी कंपनियों को…

आत्मनिर्भरता के मुखौटे

प्रधानमंत्री की अगुआई में देशभर में ‘आत्‍मनिर्भरता’ की दुंदुभी बज रही है। लगभग हरेक क्षेत्र में आत्‍मनिर्भर बनने की जुगत बिठाई जा रही है, लेकिन क्‍या मौजूदा विकास के ताने-बाने के साथ-साथ वास्‍तविक आत्‍मनिर्भरता संभव हो सकेगी? क्‍या इस आत्‍मनिर्भरता…

बदलाव को बरकाता वामपंथ

आज के राजनीतिक फलक को देखें तो विकास की मौजूदा अवधारणाओं और उसे लेकर की जाने वाली राजनीति ने भी कम्‍युनिस्‍टों को कमजोर किया है। तरह-तरह के विस्‍थापन-पलायन, जल-जंगल-जमीन की बदहाली और पर्यावरण-प्रदूषण के बुनियादी और सर्वग्राही सवाल आज भी…

आखिर जीडीपी क्या बला है ?

कृषि से केवल 16% जीडीपी आती है जब कि उसमें 65% लोग कार्यरत है और कृषि समेत कुल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोग 92 % है जबकि इससे जीडीपी में केवल 54 % आती है। इस प्रकार जीडीपी का मोटा…

क्या तनिष्क विवाद के बाद भी दोहराई जाएगी ‘विवेक’ कथा ?

चिंता इस बात की नहीं है कि एक पारसी मालिक के आधिपत्य वाली कम्पनी द्वारा जारी विज्ञापन का इतने आक्रामक तरीक़े से विरोध किया गया ( गांधीधाम, गुजरात में तो धमकियों के बाद ‘तनिष्क’ के एक शोरूम के बाहर एक…