Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Latest post

आफत में सरकार , किसान संघ का आसरा

किसान संघ की बेंगलुरू की चिंतन बैठक में दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन को लेकर चिंता व विचार मंथन होना ही था। बैठक का मुख्य मुद्दा भी यही था। क्योंकि अपने अनुषांगिक संघठन भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र सरकार…

कोराना का कहर बढ़ाते सर्दी और प्रदूषण

जैसा कि कहा गया था, कडकती सर्दी और तेजी से फैलता वायु-प्रदूषण कोरोना वायरस को खुलकर खेलने का मौका दे रहे हैं। अब कोरोना से पनपे कोविड-19 के संक्रमण के दूसरे दौर की चर्चाएं होने लगी हैं। जाहिर है, सर्वशक्तिमान…

ऊर्जा-क्षेत्र में सौर ऊर्जा की दावेदारी

हाल में कोराना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रदूषण और उसके नतीजे में होने वाले जलवायु परिवर्तन की बडी वजह ऊर्जा संयत्र हैं। वैसे भी दुनियाभर में बिजली उत्‍पादन के…

किसानों को क्यों नहीं समझा पा रही, सरकार?

कडकती ठंड और तेज बरसात में देश की राजधानी को घेरे बैठे किसानों को अब करीब डेढ महीना हो गया है, लेकिन मामला सुलझता नजर नहीं आता। किसान तीन नए कृषि कानूनों को खारिज करवाना चाहते हैं और सरकार सात-आठ…

लोकतंत्र में किसान

‘तटस्‍थ लोकतंत्री’ की नजर से देखा जाए तो एक तरफ वह सरकार दिखाई देती है जिसने दो कानून और एक संशोधन लाने के लिए किसी तरह की कोई लोकतांत्रिक औपचारिकता नहीं बरती। ना तो किसान संगठनों, उनके प्रतिनिधियों से कोई…

राष्‍ट्रवाद और आत्‍मनिर्भरता पर क्‍या कहते थे, ‘गुरुदेव?’

‘गुरुदेव’ रवीन्‍द्रनाथ टैगोर की बात करें तो राष्‍ट्रवाद और आत्‍मनिर्भरता का उल्‍लेख आ ही जाता है, लेकिन क्‍या उनके हवाले से ये दोनों मूल्‍य ठीक उसी तरह जाने-पहचाने जा सकते हैं जिस तरह आजकल इन्‍हें उपयोग किया जा रहा है?…

संभव है, नए कृषि‍ कानूनों की वापसी

कडकती सर्दी में धरना देते किसानों को महीना भर से ऊपर हो गया है, लेकिन उनके संघर्ष का कोई हल निकलता दिखाई नहीं देता। किसानों की मांग है कि नए कृषि कानूनों को खारिज किया जाए और सरकार इसके लिए…

कोरोना की वैक्सीन ही नहीं,लोकतंत्र का टीका भी ज़रूरी है !

किसानों ने जिस लड़ाई की शुरुआत कर दी है वह इसलिए लम्बी चल सकती है कि उसने व्यवस्था के प्रति आम आदमी के उस डर को ख़त्म कर दिया है जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान दिलों में घर कर…

भारी पड़ेगी , भूजल की अनदेखी

कृषि और औद्योगिक उत्‍पादन में बढौतरी ने हमारे जल-संसाधनों पर भारी संकट खड़ा कर दिया है। नतीजे में धीरे-धीरे हजारों साल में बना भूगर्भीय जल भंडार सूखता जा रहा है। इससे कैसे निपटा जाए? जब से हमारे देश में कुंओं, बावडियों…

महेंद्र भाई : कहाँ गए वे लोग, सही के प्रति आग्रह ही जिनका धर्म रहा है

सप्रेस के संस्‍थापक संपादक : महेंद्र कुमार 18 वां पुण्‍य स्‍मरण सप्रेस संस्थापक संपादक, वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक, सर्वोदयी सिद्धान्त के पोषक, वैकल्पिक विकास के एवं कार्यकर्ताओं के हितैषी, जन आन्दोलनों के समर्थक, रचनात्मक पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर महेंद्रकुमार जी ने…