Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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किसानों की बेचैनी की वजहें

दिल्ली की सीमाओं पर करीब दो महीने से ठंड, बरसात और तरह-तरह की दुर्घटनाओं को झेलते बैठे किसानों ने एन ‘गणतंत्र दिवस’ पर टैक्टर रैली का आयोजन किया था, लेकिन कुछ विघ्न-संतोषी लोगों के चलते इसमें हिंसा, मारपीट और सम्पत्ति…

साम्प्रदायिक हिंसा के जिम्मेदार लोगों को राज्य का संरक्षण

साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं के कारणों की जाँच हेतु स्वतंत्र तथ्यान्वेषी दल का निष्‍कर्ष इंदौर, 31 जनवरी 2021 । गत वर्ष दिसम्बर के महीने में इंदौर, उज्जैन, मंदसौर और अलीराजपुर जिलों में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं के कारणों की…

अब भी बचाई जा सकती है – धरती

हर साल बाढ, सूखा, आंधी, गर्मी, बर्फवारी और तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बढने का एक मतलब यह भी है कि हमने एक वैश्विक समाज की हैसियत से धरती पर रहना अब तक नहीं सीखा है। एक तरफ, हमारे कार्य-कलाप…

जरूरी हो गया है, गैर-बराबरी के ‘वायरस’ का वेक्सीन

स्विट्जरलेंड के दावोस शहर में हर साल जनवरी में दुनियाभर के अमीरों का एक जमावडा ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम’ हुआ करता है जिसके ठीक पहले वैश्विक एनजीओ ‘ऑक्सफैम’ दुनियाभर की गरीबी और गैर-बराबरी का लेखा-जोखा सार्वजनिक करता है। ‘ऑक्सफैम’ की रिपोर्ट…

क्या ट्रम्प के हार जाने से हम वाक़ई परेशान हैं ?

बाइडन के व्हाइट हाउस में प्रवेश को लेकर भारत का सत्ता प्रतिष्ठान अंतरराष्ट्रीय राजनीति की ज़रूरतों के मान से कुछ ज़्यादा ही चौकन्ना हो गया लगता है। ’अबकी बार, ट्रम्प सरकार ’ के दूध से जली नई दिल्ली की कूटनीति…

पद्मश्री भूरीबाई और ‘चित्तरकाज’

गणतंत्र दिवस पर इस साल लोक-कलाकार श्रीमती भूरी बाई को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। कोई पचास साल पहले ‘लिखमा जोखारी’ ने भूरीबाई के नाम के आगे ‘चित्तरकाज’ लिखा था जिसे भूरीबाई दिनों-दिन बढ़ती लगन से करती जा रही…

‘गण’ की महत्ता को स्वीकार करें

सरकार को चाहिए कि किसानों की मांगे स्वीकार करे और देश में एक शांतिमय-सद्भावपूर्ण माहौल बनाने की पहल करे। अब समय आ गया है कि वर्तमान राज्य सत्ता और सरकारी तंत्र अतीत के साम्राज्यवादी शासनतंत्र की प्रेत-छाया से मुक्त होकर…

किसान आंदोलन : अपने पाले में आंदोलन

‘गणतंत्र दिवस’ की 26 जनवरी पर पुलिस, प्रशासन और आंदोलनकारी किसानों के नेतृत्व के कतिपय हिस्से द्वारा अपनी-अपनी वजहों से की गईं गफलतों ने हिंसा और अराजकता का अप्रिय माहौल बना दिया था। लगने लगा था कि आजादी के बाद…

महामारी के बाद शुक्रिया अदा करने का वक़्त

कोविड योद्धाओं ने जब काम शुरू किया तो उन्हें अन्दाज़ा नहीं था कि यह कब ख़त्म होगा। हर गुज़रते हफ्‍़ते के साथ यह साफ़ होता गया कि यह संकट उनकी कल्पना से कहीं ज़्यादा लम्बा है। देखते-देखते सितम्बर आ गया,…

इस आंदोलन का “महात्मा गांधी” कौन है ?

छह महीने के राशन-पानी और चालित चोके-चक्की की तैयारी के साथ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे किसान अपने धैर्य की पहली सरकारी परीक्षा में ही असफल हो गए हैं ,क्या ऐसा मान लिया जाए ? जाँचें अब उनके सत्तर…