रिपोर्ट में कहा गया है कि वायु प्रदूषण का भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पड़ता है, इसके साथ ही स्वास्थ्य, पर्यावरण और वायु गुणवत्ता में सुधार से भारत न ही सिर्फ स्वस्थ होगा बल्कि अमीर देश भी बनेगा। वायु…
जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बने राज्य स्तरीय सलाहकार समिति सप्रेसमीडिया.इन। इंदौर, 5 मई 2021 । कोविड -19 की दूसरी लहर के प्रभाव के मद्देनजर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हाल ही में दूसरी एडवाइजरी…
स्मृति सुमन मशहूर इस्लामी विद्वान और गांधीवादी लेखक मौलाना वहीदुद्दीन खान का 22 अप्रैल को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। मौलाना वहीदुद्दीन ने कुरान का अंग्रेजी में आसान अनुवाद किया और कुरान पर टिप्पणी भी लिखी। वे…
प्रकृति को ‘प्रसाद’ मानने और उसी लिहाज से उसके ‘फलों’ का उपभोग करने की नैतिक, आध्यात्मिक निष्ठा के अलावा बीसवीं सदी में रचा गया हमारा संविधान भी पर्यावरण को लेकर खासा सचेत है। उसके कई हिस्से जल, जंगल, जमीन, वायु…
सामाजिक सरोकारों और स्त्री अधिकारों के लिए किया काम सप्रेसमीडिया.इन । प्रख्यात मीडिया शिक्षक और जनसंचार विशेषज्ञ प्रो. दविंदर कौर उप्पल (75 वर्ष) का 4 मई 2021 को 02:37 बजे निधन हो गया। घर पर गिर जाने के कारण…
प्रभु जोशी / श्रध्दा सुमन इस कठिन समय में एक के बाद एक महत्वपूर्ण करीबी व्यक्तित्व हमसे बिछुड़ रहे है। यह हमारे समय का सबसे भीषणतम दौर है…। प्रभु जोशी जी का जाना हमारे लिए अपूरणीय व्यक्तिगत पारिवारिक क्षति है।…
कोविड-19 महामारी के इस दौर में जिस अदृश्य, अ-स्पर्शनीय, गंधहीन और केवल महसूस की जाने वाली प्राणवायु यानि ऑक्सीजन की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, वह अपने आसपास की वनस्पतियों, पेडों में भरपूर मौजूद है। लेकिन क्या…
अखिल गोगोई असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी पहचान बड़े बांधों का विरोध करने वाले, जैव विविधता को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले, जैव विविधता पार्क बनाने वाले…
96 वर्षीय गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सुमनताई का निधन सेवाग्राम, 3 मई । गांधीवादी, स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री सुमनताई का आज 3 मई 21 (सोमवार) को कस्तूरबा अस्पताल में निधन हो गया। वे 96 वर्ष…
कोविड-19 के इस मारक दौर में दवाओं, अस्पतालों, प्राणवायु और उसके सिलिन्डरों की भारी कमी है और उनकी कालाबाजारी तक हो रही है। क्या इसका बाजार की हमारी उस मौजूदा व्यवस्था से भी कुछ लेना-देना है जिसने नब्बे के दशक…