लोकतंत्र की दुर्दशा से बेचैन भारतीय समाज एक ओर बिहार के चुनाव में बदलाव की उम्मीद देख रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका में उठे ‘नो किंग्स’ आंदोलन से प्रेरणा ले रहा है। जब सत्ता पूंजी के कब्जे में और…
सर्व सेवा संघ की पदयात्रा — वाराणसी राजघाट से दिल्ली राजघाट तक पदयात्रा का 32वां दिन मुरादगंज (औरैया), 2 नवम्बर। सर्व सेवा संघ द्वारा आयोजित ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा रविवार को अपने 32वें दिन साईं धर्मशाला से प्रस्थान…
इंदौर, 2 नवबंर। साहित्य, कला और संस्कृति के सबसे जीवंत और चमकदार उत्सव “इंदौर लिटरेचर फेस्टिवल” का 11वां सीजन आगामी 14-15-16 नवंबर को होने जा रहा है। अपने स्तरीय आयोजनों से यह फेस्टिवल देश ही नहीं दुनिया भर में इंदौर…
हाल ही में मैं एक नदी संसद का साक्षी था, जहां दक्षिण एशिया की नदियाँ अपने साझा संकटों पर चर्चा करने जुटी थीं। इस अनोखे संगम की मेजबानी नर्मदा ने की, जो पूरे क्षेत्र की नदियों से समान दूरी पर…
वर्ष 1964 में साहित्य के नोबेल को ठुकराते हुए ज्यां पॉल सात्र ने तो उसे ‘आलू के बोरे’ का दर्जा दिया था, लेकिन छह दशक बाद 2025 में वेनेजुएला की जिन मारिया कोरिना माचाडो को शांति का नोबेल दिया गया…
विकास के सतत और समावेशी मॉडल पर जोर : तुषार गांधी समेत नामी कार्यकर्ता शामिल हाजीपुर, 31 अक्टूबर। बिहार के हाजीपुर में आज सामाजिक न्याय, राज्य के विकास और जनता के बुनियादी मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण चर्चा का आयोजन किया…
कुछ दिन पहले तक केन्द्र की भाजपा सरकार के लाडले माने जाने वाले सोनम वांगचुक और उनके संगी-साथी अचानक देशद्रोही, विदेशी पूंजी पर पलने वाले और हिंसा भडकाने वाले कैसे और क्यों हो गए? ध्यान से देखें तो सरकारों का…
राष्ट्रीय एकता केवल भौगोलिक सीमाओं का मेल नहीं, बल्कि विविधताओं के बीच बंधुत्व, सहिष्णुता और साझा मूल्यों की भावना है, जो भारत को “एकता में अनेकता” का जीवंत उदाहरण बनाती है। सरदार पटेल के एकीकरण से लेकर बाबा आमटे की…
यह विज्ञान का चमत्कार ही है कि आधुनिक जीवन की अधिकांश सुविधाएं एक मामूली-सी ‘सेमीकंडक्टर चिप’ में समाहित हो गई हैं। आज की दुनिया में इसी ‘चिप’ को हासिल करने, बनाने की होड मची है। अपना देश भी इस दिशा…
कुमार अम्बुज की कविताएँ हमारे समय की बेचैनियों, विडंबनाओं और उम्मीदों की साक्षी हैं। हाल ही में कुसुमाग्रज सम्मान से सम्मानित अम्बुज ने अपने लेखन से यह सिद्ध किया है कि कविता केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज के…