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पर्यावरण के संरक्षक हैं आदिवासी

9 अगस्त : विश्व आदिवासी दिवस जल, जंगल और जमीन को परंपराओं में भगवान का दर्जा देने वाले आदिवासी बिना किसी आडंबर के जंगलों और स्वयं के अस्तित्व को बचाने के लिए आज भी निरंतर प्रयासरत है। यह समुदाय परंपराओं…

जनसंख्या की जद्दो-जहद

जनसंख्या की जिस वृद्धि को अब तक दुनियाभर में एक संकट की तरह माना जाता था वह आजकल सत्ता और संख्या या आंकडों की राजनीति चमकाने के काम आने लगी है। भारत में चुनाव जीतने से लगाकर विकास के क्षेत्रीय…

लाल क़िले की प्राचीर से इस बार क्या कहने वाले हैं प्रधानमंत्रीजी !

प्रधानमंत्री ने अपनी हाल की बनारस यात्रा के दौरान कोरोना महामारी के देश भर में श्रेष्ठ प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सार्वजनिक रूप से बधाई दी थी। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे प्रधानमंत्री के वर्ष 2022 के स्वतंत्रता…

जीवाश्म ईंधन से जुड़े फेसबुक विज्ञापनों पर हुआ $9.6 मिलियन का खर्च, 431 मिलियन बार लोगों ने देखा

इन्फ्लुएंसमैप एक लंदन स्थित थिंक टैंक है, जो ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर विश्लेषण प्रदान करता है, व्‍दारा हाल ही में किये एक ताज़ा शोध से पता चलता है कि फेसबुक पर जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से…

विलास सोनवाने : समता और स्वतंत्रता के योद्धा

स्‍मृति शेष : श्रद्धांजलि सामाजिक कार्यकर्त्‍ता विलास सोनवाने का पुणे में 4 अगस्‍त 21 को निधन हो गया। विलास सोनवाने लोकतंत्र के लिए समर्पित थे। विगत चार सालों से वे पारकिन्सन से पीड़ित थे। सैकड़ों युवाओं को प्रभावित करने वाला…

क्यूबा : मजबूरी में भी कारगर, महात्मा गांधी

सर्वशक्तिमान अमरीका की एन नाक के नीचे बैठकर उसकी खामियों पर उंगली रखने वाले तीसरी दुनिया के देश क्यूबा को आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों के रूप में उसका खामियाजा भुगतना पडा है, लेकिन क्यूबा ने इस आपदा को अवसर में…

विचार : लोकतंत्र में अलोकतांत्रिक व्यवहार

दुनियाभर में वापरी जा रही लोकतांत्रिक प्रणाली व्यवहार में कितनी कारगर है, यह उसके मैदानी अमल से उजागर होता रहता है। व्यक्ति और समाज के स्तर पर लोकतंत्र के कसीदे काढने वाले अपने निजी, राजनैतिक और सामाजिक जीवन में कितने…

सामयिक : हीरों के लिए हार मानने से इंकार

मध्‍यप्रदेश में पानी की कमी से बिलबिलाते बुंदेलखंड में इन दिनों हीरा उत्खनन और उसके विरोध की आपाधापी का दौर जारी है। ठीक इन्हीं परिस्थितियों में करीब तीन दशक पहले अफ्रीका में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। बोत्सवाना में…

स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ देने की जरूरत : पी. साईंनाथ

पत्रकारिता और मीडिया को गड्डमड्ड करना और एक ही समझना ठीक नहीं है| आधी सदी पहले वे दोनों एक सरीखे ही रहे हों, पर आज नहीं हैं। देश के मीडिया के बड़े हिस्से पर कारपोरेट सेक्टर का कब्जा है। आज…

बाघ : ‘उनका अस्तित्व हमारे हाथ में है’

जंगलों के विनाश से बाघों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है। इसलिए बाघों के संरक्षण के प्रति जागरूकता हेतु ‘विश्व बाघ दिवस’ मनाया जाता है। वर्ष 2010 में रूस के…