Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

Latest post

GST बनाम गब्‍बरसिंह टैक्‍स : हमारा पैसा हमारा हिसाब

जीएसटी की शुरुआत टैक्स प्रणाली को सरल बनाने और डबल टैक्स से बचने के लिए की गयी थी। लेकिन अब हर रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली चीज पर टैक्स देना पड़ रहा है। इसमें सबसे नया है- आटा,…

श्रीलंका : सत्ताओं की सियासत

पडौसी श्रीलंका की मौजूदा उठा-पटक में वहां के भगोडे राष्ट्रपति नंदसेना गोटाबाया राजपक्षे को संकट में मिली मदद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ताएं एक-दूसरे की मददगार होती हैं और वे सब अंतत: जनता की मुखालिफत…

आज के दौर में गांधी की अहमियत

हमारे समय की बदहाली से निपटने में महात्मा गांधी और उनके सिद्धांन्त एक कारगर औजार हो सकते हैं। हिंसा, आपसी वैमनस्य, गला-काट प्रतिस्पर्धा, साम्प्रदायिक कटुता आदि से निपटने और उनके सामने सीधे खडे हो पाने में गांधी के विचार ही…

गांधी की हत्या का सिलसिला जारी है !

गांधी को अब उनके घर में घुसकर मारा जा रहा है। अभी तक कोशिशें बाहर से मारने की ही चल रहीं थीं पर वे शायद पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं। जनता चुप है और बापू के अधिकांश अनुयायियों ने…

आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस : इंसान से आगे मशीन

अंग्रेजी के विज्ञान- उपन्यासकार एचजी वेल्स,आइजक आसीमोव आदि की काल्पनिक कथाओं के बाद पचास के दशक में जार्ज ऑरवेल ने अपने उपन्यास ‘1984’ की मार्फत बताया था इंसानों पर यदि मशीनें राज करने लगेंगी तो क्या होगा। अब लगता है,…

बूस्टर डोज़ का महत्व निजी नहीं, सार्वजनिक है

महामारी के टीके द्वारा हमारा लक्ष्य है कि कम से कम 80 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो जाए ताकि समाज में एक ‘कवच’ बन जाए और महामारी को फैलने का रास्ता ना मिले। यह एक सार्वजनिक ज़रूरत है। इसे मात्र…

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी है, विकेन्द्रीकरण

हाल के ‘कोविड-19’ ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। क्या है, जिसके चलते हम सस्ती, सर्वसुलभ और सेवाभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर नहीं कर पाते? एक कारण है, सरकारी…

सद्भावना के लिए ‘सर्व धर्म समभाव’

महात्मा गांधी ने आजाद भारत के लिए कई तरह की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की कल्पना की थीं, लेकिन दुर्भाग्य से वे आजादी के साढे पांच महीनों में ही हम से सदा के लिए विदा हो गए। बाद में उनके…

‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ : हिंदी का बोलबाला

लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद हाल में हिंदी, उर्दू और बांग्ला भाषाओं को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ में मान्यता मिल गई है। दक्षिण एशिया की इन तीनों भाषाओं को बोलने वाली विशाल आबादी दुनियाभर में फैली है और अब समय आ…

सरकार लोकतांत्रिक मूल्‍यों में विश्‍वास रखने वाले जनसंगठनों और आमजन की आवाज़ सुनने को तैयार नहीं

समता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों पर मध्यप्रदेश के जनसंगठनों द्वारा भोपाल में जन सुनवाई आयोजित भोपाल, 19 जुलाई 2022। मध्य प्रदेश के करीब 24 जिलों के करीबन 50 युवा /बुजुर्गों ने किसानी, श्रमिक अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा जल, जंगल,…