डिंडोरी : समृद्ध जल संसाधनों के बीच प्यासा आदिवासी समाज
डिंडोरी को जल अभावग्रस्त घोषित किया जाना केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि गहराते जल संकट की गंभीर चेतावनी है। गिरते भूजल, सूखते स्रोतों और बढ़ती गर्मी के खतरे के बीच पानी के उपयोग पर नियंत्रण लागू किया गया है। आदिवासी…
कृषि : खतरे में खेती
भारत-अमरीका के बीच जारी व्यापारिक बातचीत में एक अडंगा ‘जीन संवर्धित’ (जीएम) अमरीकी मक्का और सोयाबीन को भारत में खपाना भी है। यदि इस समझौते को मंजूरी मिल जाती है तो हमारी खेती को अपने समाज और उससे जुड़े सचराचर…
‘पेसा’ की पहल से बढ़ेगा जनजातियों का गौरव
लगभग तीन दशक पहले भारत की संसद ने आदिवासी इलाकों के लिए एक बेहद जरूरी कानून ‘पेसा’ पारित किया था। इसमें आदिवासी समाज को उनकी पारंपरिक स्वायत्तता और उसी के मुताबिक आसपास के संसाधनों को वापरने की अनुमति दी गई…
वन अधिकार कानून और वन संरक्षण अधिनियम आदिवासी हितों का पूरक
वनवासियों के आवास अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिससे वनवासी समुदाय को आवास का…
बालाघाट में आदिवासी समाज का दो दिवसीय ‘घेरा ड़ालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू
वनग्रामों के विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्ष का आह्वान बालाघाट, 8 अक्टूबर। वन ग्रामों को विस्थापित किए जाने सहित जल, जंगल, जमीन और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के बैनर तले आज से दो दिवसीय घेरा डालो- डेरा…
कार्पोरेट लूट और भूमि कब्ज़ा के खिलाफ किसानों की राष्ट्रपति से गुहार
देशभर के संगठनों ने भेजा पत्र, राष्ट्रीय एकता दिवस पर उठी आवाज़ नई दिल्ली, 13 अगस्त। भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर देशभर के किसान संगठनों, जन आंदोलनों और मानवाधिकार समूहों ने आज राष्ट्रपति को पत्र भेजकर प्राकृतिक संसाधनों की…
आदिवासी जीवन एवं प्रकृति दर्शन : टिकाऊ भविष्य की ओर
हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व आदिवासी दिवस, उन समुदायों के जीवन दर्शन और प्रकृति संग सह-अस्तित्व की अनूठी परंपरा को सम्मानित करने का अवसर है। जंगल, जल और जमीन से गहरे जुड़े आदिवासी समाज का ज्ञान,…
World Indigenous Day : मौजूदा विकास के विपरीत है, आदिवासी जीवन
आदिवासी समाज की बदहाली को देखना-समझना चाहें तो आसानी से उस संवेदनहीनता पर उंगली रखी जा सकती है जिसे लेकर सत्ता, सेठ और समाज आदिवासियों को अपनी तरह के विकास की चपेट में फांसने में लगे हैं। कमाल यह है…
दिशोम गुरु शिबू सोरेन : आदिवासी अस्मिता के प्रतीक
शिबू सोरेन के निधन के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से लोकप्रिय रहे सोरेन ने आदिवासी अधिकारों, महाजनी शोषण, शराबबंदी और झारखंड राज्य की मांग को लेकर जीवनभर संघर्ष किया। टुंडी…
प्राकृतिक संसाधनों पर समुदायों का अधिकार अभियान जारी रहेगा
जन स्वाभिमान यात्रा का मंडला में समापन, विस्थापन व निजीकरण के खिलाफ उठीं आवाजें मंडला, 1 जुलाई। बालाघाट से 9 जून को प्रारंभ हुई 21 दिवसीय जन स्वाभिमान यात्रा का समापन सोमवार को मंडला जिले के संगम घाट, महाराजपुर में…









