वैश्विक पर्यावरण

वैश्विक तापमान में वृद्धि : आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं 10 प्रतिशत तक बढ़ेगी

नासा के आधिकारिक आकंड़ों के अनुसार वेनेज़ुएला की झील मैराकाइबो का नाम सबसे ज़्यादा बिजली चमकने वाले स्थान के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। यहां प्रत्येक साल प्रत्येक किलोमीटर पर 250 बार बिजली चमकती है।…

महासागरों में गंभीर चक्रवातों की आवृति में हुई 150% की बढ़त

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल बताते हैं, “अरब सागर में चक्रवाती गतिविधि में वृद्धि, समुद्र के बढ़ते तापमान और ग्लोबल वार्मिंग के कारण नमी की बढ़ती उपलब्धता से मज़बूती से जुड़ी हुई है। इसका तात्पर्य न केवल ऐसी घटनाओं…

जलवायु परिवर्तन: ‘फिट फॉर 55’ पैकेज लायेगा यूरोपीय संघ को जलवायु तटस्थता के करीब

यूरोपीय आयोग ने दावा किया है कि जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उसकी तरफ से पेश योजना दुनिया की इस मकसद से बनाई गई सबसे महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत साल 2030 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 55…

बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैव विविधता के लिए हानिकारक : वैश्विक जैव विविधता पैनल

‘‘मानव की हानिकारक गतिविधियों के कारण कुदरत और लोगों के प्रति उसके योगदान पर खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसमें जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने की उसकी क्षमता भी शामिल है। धरती जितनी गर्म होती जाएगी, विभिन्‍न क्षेत्रों…

वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 76% के लिए अकेले G20 देश ज़िम्मेदार

चीन वैश्विक उत्सर्जन के एक चौथाई से ज़्यादा के लिए ज़िम्मेदार है। चीन ने 2060 तक नेट ज़ीरो को हासिल करने,2030 तक उच्चतम उत्सर्जन तक पहुंचने और 2025 के बाद कोयले के उपयोग को कम करने के लिए प्रतिबद्धता दी…

कृत्रिम ऑक्सीजन पर भारी है, प्राकृतिक प्राणवायु

कोरोना महामारी के दौरान सर्वाधिक याद किया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन या प्राणवायु रहा है जो हमारे आसपास के पेड-पौधों की मेहरबानी से वायुमंडल में इफरात में मौजूद है, लेकिन उसके साथ हम क्या करते हैं? ‘केजी-1’ में पढने वाले…

श्रम उत्पादकता को 21% घटा रहा है बढ़ता वेट बल्ब तापमान

वैज्ञानिकों ने भारत को सबसे गर्म महीनों में, जब डब्ल्यूबीजीटी 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच होती है, के दौरान श्रम उत्पादकता के लिहाज से उच्च जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रखा है। वैश्विक तापमान में 3 डिग्री…

जलवायु परिवर्तन के कारण बदल रहा है भारत के मानसून का मिजाज़

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से होने वाली चरम घटनाओं का कृषि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, विशेष रूप से भारत के लिए जहां अभी भी खेती की भूमि का एक बड़ा हिस्सा मानसून की बारिश पर निर्भर है। भारत एक…

पिघलते ग्‍लेशियर और जलवायु परिवर्तन की मार, कर रही है हिंदु कुश क्षेत्र पर वार

‘साइंस’ जर्नल में प्रकाशित ताजा अध्‍ययन के निष्‍कर्ष हिमालय-काराकोरम पर्वत श्रंखलाओं के ग्‍लेशियर पिघलने से एक बिलियन से ज्‍यादा लोगों की पानी सम्‍बन्‍धी जरूरतें पूरी होती हैं। अगर इस पूरी सदी के दौरान ग्‍लेशियर का एक बड़ा हिस्‍सा पिघल जाता…

दुगुना प्रभाव बढ़ाएगा मानसून में मुंबई की परेशानी, जलवायु परिवर्तन का असर भी साफ़

जलवायु परिवर्तन के कारण तटीय भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बढ़ रहे हैं, अनियोजित विकास इन शहरों की भेद्यता में इजाफा करता है। उदाहरण के लिए, पिछले एक दशक में भारत में बाढ़ से 3 अरब डॉलर की आर्थिक क्षति हुई…