घटते चारागाह, बढ़ती बहु-फसली खेती और घटती पशुओं की साज-संभाल ने बैलों को अब ट्रैक्टरों से विस्थापित कर दिया है, लेकिन ट्रैक्टरों के भी अपने संकट हैं। मसलन – ट्रैक्टरों को वाहनों का दर्जा दिया जाना, जिसके चलते उन पर…
जब दुनिया तकनीकी तरक्की पर गर्व कर रही है, तब भी करोड़ों लोग भूख से जूझ रहे हैं। हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस हमें याद दिलाता है कि विकास का असली मापदंड पेट भर…
National Women Farmers Day इस तथ्य की याद दिलाता है कि खेतों में बीज से लेकर फसल तक का अधिकांश कार्य महिलाएं करती हैं, परंतु पहचान और नीति में वे अब भी हाशिए पर हैं। झाबुआ जैसे इलाकों में उनके…
देश में रासायनिक और प्राकृतिक खेती के बीच जारी बहस को एक नए अध्ययन ने नया मोड़ दिया है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि प्राकृतिक खेती न तो आय में…
देश के गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘प्राकृतिक’ और ‘जैविक’ खेती की पैरवी करते हुए खुद को इन पद्धतियों का प्रशंसक बताया था। केन्द्रीय कृषि बजट के 70 फीसदी को उर्वरक सब्सीडी में लगाने वाली सरकार के वरिष्ठ…
चार दिन बाद शुरु होने वाले संसद के मानसून सत्र में, उम्मीद है, किसानों के लिए ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ यानि ‘एमएसपी’ की कानूनी गारंटी पर गंभीरता से चर्चा हो। क्या हैं, ‘एमएसपी’ को कानूनी हक बनाने में अडंगे? और ये…
जी.एम. मुक्त भारत गठबंधन की ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठी पारदर्शी नियमन और जैव सुरक्षा की मांग नई दिल्ली, 26 जून। देशभर के सैकड़ों वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों और नागरिकों ने दो जीनोम एडिटेड धान किस्मों की जल्दबाज़ी में स्वीकृति को…
अमरीका भारत से जीएम फसलों पर प्रतिबंध हटाने और कृषि शुल्क कम करने का दबाव बना रहा है, ठीक उसी समय नीति आयोग का दस्तावेज इन मांगों को स्वीकार्य रूप में पेश करता है। जीएम फसलों और सस्ती मक्का के…
बरसों-बरस के अनुभव और तौर-तरीकों से विकसित हुई कृषि पद्धतियों में उत्तराखंड सरीखे पहाडी इलाकों की ‘बारहनाजा’ पद्धति भी है जिसमें स्थानीय संसाधनों, बीजों और पौष्टिकता से भरपूर उत्पादन इंसानों, पशुओं और जीव-जन्तुओं का पेट भरती है। खेती-किसानी के आर्थिक…
भारत में टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा की तलाश ने जेनेटिकली मॉडिफाइड और जीनोम संपादित बीजों को चर्चा में ला दिया है। सरकार इन्हें क्रांतिकारी बताती है, लेकिन बीटी कपास और जीएम सरसों जैसी पिछली असफलताएँ चेतावनी देती हैं। सवाल…