इंदौर में सेवा सुरभि द्वारा आयोजित गांधी जयंती व्याख्यान में राहुल देव का उद्बोधन इंदौर, 28 सितम्बर। “आज के हर मोहल्ले और हर शहर में दस-दस, पचास-पचास गांधी चाहिए। जब तक गांधी की राह पर चलने वाले लोग सामने नहीं…
नई दिल्ली, 23 सितंबर। एक ऐसे दौर में जब दुनिया हिंसा, असमानता और पर्यावरण संकट से जूझ रही है, गांधी के विचार फिर से उम्मीद और प्रकाश का स्रोत बनकर सामने आए हैं। इसी दृष्टि से 22 सितंबर, 2025 को…
जयपुर। आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती का आयोजन विनोबा ज्ञान मंदिर, बापू नगर, जयपुर में किया गया। इस अवसर पर जयपुर के विभिन्न उच्च माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विनोबा ज्ञान मंदिर, गांधी की गतिविधियों का…
आशा पटेल जापान। गांधी शांति प्रतिनिधिमंडल जापान के माउंट फ़ूजी के समीप स्थित शिनफ़ूजी रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ प्रतिनिधिमंडल का स्वागत सुश्री युका सायोनजी ने किया। वे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री प्रिंस सायोनजी किनमोची की परनातिन तथा GOI पीस फाउंडेशन…
जगदीप छोकर अब नहीं रहे। एडीआर के संस्थापक और लोकतंत्र में चुनावी सुधार के लिए समर्पित इस जुनूनी व्यक्ति की विदाई केवल एक इंसान की नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष की भी विदाई है। छोकर ने साबित किया कि…
भारत विभाजन की त्रासदी को लेकर सत्ता समर्थक लेखक और एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल इतिहास को अधूरा व पक्षपाती रूप में पेश करते हैं। हिंदू महासभा-आरएसएस की भूमिका गायब है, नेहरू–पटेल का असमान चित्रण है और अंग्रेज़ों की जिम्मेदारी को…
अपने-अपने देश-काल के बरक्स हम अपने-अपने लोकतंत्र को चुनते, समझते और वापरते हैं, लेकिन क्या यह वही सर्व-जन-हिताय लोकतंत्र होता है जिसके भरोसे दुनिया के हम अधिकांश निवासी अपनी-अपनी वैतरणी पार करने के मंसूबे बांधते हैं? एक-दूसरे को नेस्तनाबूद करने…
हम चाहें या ना चाहें, इंसानियत को बचाए रखने के लिए अहिंसक, लोकतांत्रिक और मानवीय प्रयासों की ही जरूरत पड़ती है। ये प्रयास सामूहिक हों तो और बेहतर। ऐसे प्रयासों को कारगर बनाने के लिए उन्हें लगातार याद करते रहना…
पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब अमीर ‘मित्र-राष्ट्र’ दुनिया का हिस्सा-बांटा कर रहे थे, भारत में महात्मा गांधी शांतिपूर्ण, अहिंसक और दोस्ताना दुनिया के भविष्य की जुगत बिठा रहे थे। क्या 80-85 साल पहले दुनिया के सत्ताधारियों, खासकर पश्चिम एशिया के…