जापान में हरिजन सेवक संघ के गांधी शांति मिशन की यात्रा, विश्व शांति के लिए भारत-जापान का साझा संकल्प

आशा पटेल

जापान। गांधी शांति प्रतिनिधिमंडल जापान के माउंट फ़ूजी के समीप स्थित शिनफ़ूजी रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ प्रतिनिधिमंडल का स्वागत सुश्री युका सायोनजी ने किया। वे जापान के पूर्व प्रधानमंत्री प्रिंस सायोनजी किनमोची की परनातिन तथा GOI पीस फाउंडेशन एवं उसकी सहयोगी संस्था May Peace Prevail on Earth International की पूर्व बोर्ड सदस्य हैं। सुश्री सायोनजी के वाहन से प्रतिनिधिमंडल लगभग एक घंटे की यात्रा कर GOI पीस फाउंडेशन के शांति पार्क पहुँचा, जहाँ 194 देशों के राष्ट्रीय ध्वज फहराए गए हैं। जापान सरकार ने इस पार्क को आधिकारिक रूप से Peace Centre के रूप में मान्यता दी है।

हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष डॉ. शंकर कुमार सान्याल के नेतृत्व में गांधी शांति मिशन इस समय कोरिया और जापान की यात्रा पर है। इस चार सदस्यीय दल में श्रीमती शिखा सान्याल, पी. मारुती और संजय राय शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विश्व शांति पार्क में पहुंचकर विश्वशांति के लिए सामूहिक सर्वधर्म प्रार्थना की। इसी अवसर पर संत विनोबा भावे की 93वीं जयंती मनाई गई। इस दौरान महात्मा गांधी और विनोबाजी के जीवन एवं विचारों पर चर्चा हुई और उन्हें नमन किया गया।

डॉ. शंकर कुमार सान्याल ने कहा कि बाबा विनोबा के अहिंसा, शांति और सत्य के संदेश आज के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में और भी प्रासंगिक हैं।

GOI पीस फाउंडेशन, जिसका मुख्यालय टोक्यो में है, वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक एवं निजी संगठनों के साथ मिलकर शांति निर्माण के विभिन्न मॉडल विकसित करता है। इसका उद्देश्य नैतिक और सशक्त समाज निर्माण की दिशा में योगदान देना है। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत फाउंडेशन के मुख्य कार्यालय में किया गया, जहाँ प्रमुख रूप से अध्यक्ष तोमोहीको नाया, निदेशक नोरियो युजावा, निदेशक युज़ुरु किक्कावा तथा ब्याक्को शिन्को काई, हितोआना, फुजिनोमिया-शी, शिज़ुओका-केन, जापान के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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ब्याक्को शिन्को काई एक अंतरराष्ट्रीय जनआंदोलन है, जिसकी स्थापना 1950 के दशक में जापानी दार्शनिक एवं आध्यात्मिक नेता मसाहिसा गोई ने की थी। इस आंदोलन का उद्देश्य प्रार्थना के माध्यम से विश्वशांति की परिकल्पना को साकार करना है। सुश्री युका सायोनजी भी शांति शिक्षा और सतत वैश्विक समाज के निर्माण हेतु अनेक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे वर्ल्ड पीस लाइब्रेरी और ब्याक्को शिन्को काई के साथ मिलकर विश्वभर में शांति संस्कृति को प्रोत्साहित कर रही हैं।

प्रिंस सायोनजी किनमोची जापान के विख्यात राजनेता, राजनयिक और दो बार प्रधानमंत्री रहे। वे जेनरो (Genrō) नामक उस विशेष समूह के अंतिम सदस्य थे जिन्होंने जापान को मेइजी और ताइशो काल में मार्गदर्शन दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत के गांधीवादी शांति कर्मियों और जापान के GOI पीस फाउंडेशन के बीच सहयोग एवं मैत्री का नया अध्याय प्रारंभ हुआ। दोनों देशों ने साझा संकल्प लिया कि हिंसा और युद्ध से मुक्त होकर विश्व को शांति और करुणा की राह पर अग्रसर किया जाएगा।

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