Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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पृथ्‍वी दिवस : पेड़ लगाने का पराक्रम

22 अप्रैल : विश्‍व पृथ्‍वी दिवस पर विशेष प्रकृति को पस्त करके विकसित होने की मारामार में लगा कथित आधुनिक समाज अपने को कालजयी मानने की गफलत भी पाले रहता है, हालांकि उसे अक्सर अपनी इस मान्यता की कीमत भी…

आईये, जाने दुनिया के सबसे बड़े नागरिक आयोजन ‘पृथ्वी दिवस’ (World Earth day) के बारे में

पृथ्वी पर प्रकति का संतुलन बनाये रखने तथा भविष्य में जीवन जीने के लिए प्राकृतिक संपत्ति व संसाधनों को बनाये रखना अति आवश्यक है। धरती को बचाने का आशय है इसकी रक्षा के लिए पहल करना। पृथ्वी हमारा घर है और…

विश्व-समाज की जिम्मेदारी है, पृथ्‍वी को बचाने की

22 अप्रैल : विश्‍व पृथ्‍वी दिवस    इक्कीसवीं सदी आते-आते पर्यावरण की बदहाली ने हमें लगातार उसे याद रखने की मजबूरी के हवाले कर दिया है। विश्व पृथ्वी दिवस को वैश्विक जलवायु (Global warming) संकट के प्रति जागरुकता लाने के…

कोरोना की अकथ कहानी

गरीबी कोई दबी-छिपी, अर्थशास्त्रियों के अबूझ आंकडों भर की बात नहीं रही है। देशभर में अचानक बेरोजगार हुए ग्रामीण मजदूरों ने कठिन हालातों में, पैदल अपने-अपने गांव-देहात लौटकर सबको गरीबी और भुखमरी के दर्शन करवा दिए थे। ऐसे में क्या…

मौतों के ‘तांडव’ के बीच निर्मम चुनावी स्नान ?

इस समय हमारे शासक अपने ही नागरिकों से हरेक चीज़ या तो छुपा रहे हैं। धोखे में रखा जा रहा है कि किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं है। वैक्सीन, ऑक्सिजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन, अस्पतालों में बेड्स, डाक्टर्स आदि का…

समाचार

102 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी पंडित विश्वम्भरनाथ तिवारी की पहली पुस्तक “आर्यावर्त से इण्डिया बरास्ते भारत” का प्रकाशन

इंदौर में बसी बेटी ने प्रकाशित की पिता के आलेखों की पुस्तक इंदौर। इंदौर में रहने वाली बेटी साहित्यकार श्रीमती पद्मजा बाजपेयी ने लगभग 102 वर्ष की आयु के पिता पंडित श्री विश्वम्भरनाथ तिवारी की पहली पुस्तक “आर्यावर्त से इण्डिया…

कोरोना – काल में कोयला मजदूर

हमारे देश में ऊर्जा यानि बिजली का अधिकांश हिस्सा कोयले से बनाया जाता है, लेकिन उसे धरती से निकालने वाले मजदूर बेहाल हैं। कोविड-19 बीमारी के चलते देशभर में समय-समय पर लगा ‘लॉकडाउन,’ कोयला खदानों पर कोई खास असर तो…

“भूख के विरुद्ध भात के लिए . . . .!”

भूख हमारे समय की सर्वाधिक व्यापक और गहराई से महसूस की जाने वाली सचाई है, लेकिन उससे निपट पाने की कोई कारगर तजबीज अब तक हाथ नहीं लगी है। एक तरफ, तरह-तरह के खाद्य-सुरक्षा कानूनों और सरकारी, गैर-सरकारी प्रयासों के…

कोराना-काल में अन्य बीमारियां

पिछले साल-सवा साल से कोविड-19 संक्रमण दुनियाभर को हलाकान किए है, लेकिन क्या इसके चलते दूसरी बीमारियों की तरफ से मुंह फेरा जा सकता है? क्या आमतौर पर होने वाली बीमारियां, कोविड-19 की अफरातफरी में इलाज न मिलने के कारण…

बिहारी लाल : मौन सेवक व कर्मयोगी की तरह निभाते रहे भूमिका

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि महात्मा गांधी, विनोबा भावे एवं जयप्रकाश नारायण के विचारों को आत्मसात करने वाले समाजसेवी एवं सर्वोदयी नेता बिहारी लाल नागवाण ने गांधीवादी परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ समाज में व्याप्त कुरूतियों को उखाड़ फेंकने के…