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कृत्रिम ऑक्सीजन पर भारी है, प्राकृतिक प्राणवायु

कोरोना महामारी के दौरान सर्वाधिक याद किया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन या प्राणवायु रहा है जो हमारे आसपास के पेड-पौधों की मेहरबानी से वायुमंडल में इफरात में मौजूद है, लेकिन उसके साथ हम क्या करते हैं? ‘केजी-1’ में पढने वाले…

समाचार

फादर स्टेन स्वामी की मौत से पुलिस, अभियोजन और न्याय व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर हुई है

समाजवादी जन परिषद के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लिंगराज आजाद, अफ़लातून, राष्ट्रीय महासचिव एवं चन्द्र भूषण चौधरी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वयोवृद्ध संत और सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्त्ता फादर स्टेन स्वामी के उत्पीड़न और सरकार द्वारा नियोजित हत्या…

श्रम उत्पादकता को 21% घटा रहा है बढ़ता वेट बल्ब तापमान

वैज्ञानिकों ने भारत को सबसे गर्म महीनों में, जब डब्ल्यूबीजीटी 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच होती है, के दौरान श्रम उत्पादकता के लिहाज से उच्च जोखिम वाले देशों की श्रेणी में रखा है। वैश्विक तापमान में 3 डिग्री…

सरकार ने संवैधानिक रूप से मिले ‘विरोध का अधिकार’ और ‘आतंकवादी गतिविधि’ के बीच अंतर की रेखा को धुंधला कर दिया

फादर स्टेन की मृत्यु पर मजदूर किसान शक्ति संगठन ने जारी किया वक्तव्य राजस्थान में स्थित मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) ने फादर स्टेन स्वामी की मौत पर दुख व्‍यक्‍त करते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी झारखण्ड…

बड़ा सवाल : फादर स्टेन स्वामी की मौत का जिम्मेदार कौन?

भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी (Stan Swamy) का निधन हो गया है। हाल ही में बहुत ज्यादा तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया…

कोरोना : महामारी में उघरती स्वास्थ्य-व्यवस्था की बदहाली

कहा जाता है कि संकट में समस्याओं से निपटने की असली परीक्षा होती है। इस लिहाज से देखें तो कोरोना महामारी के दौरान हमारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बुरी तरह भद्द पिटी है। इलाज के लिए दवाओं, उपकरणों और आक्सीजन की…

ख्वाजा अहमद अब्बास : फिल्म और कलम इनके लिए क्रांति के औजार थे

– विनीत तिवारी  अब्बास ख्वाजा अहमद साहब की प्रतिभा का एक बड़ा क्षेत्र उनकी पत्रकारिता भी थी। “ब्लिट्ज” में छपने वाला उनका स्तम्भ “लास्ट पेज” इतना लोकप्रिय था कि अनेक पाठक अखबार को आख़िरी पन्ने से पढ़ना शुरू करते थे।…

कोरोना से बच्चों को बचाने की कोशिशें

पिछले डेढ-दो सालों से दुनियाभर को बदहवास रखने वाली कोविड-19 महामारी ने बच्चों को सर्वाधिक प्रभावित किया है। उनके स्कूलों, खेल के मैदानों, घरों तक में एक ऐसा अनजाना डर पैठ गया है जिसने उनके सहज जीवन को मटियामेट कर…

‘इस’ और ‘उस’ आपातकाल के बीच का असली सच क्या है?

नरेंद्र मोदी को आपातकाल के ‘काले दिनों’ और उस दौरान ‘लोकतांत्रिक मूल्यों’ को कुचले जाने की बात इसलिए नहीं करना चाहिए कि कम से कम आज की परिस्थिति में ‘भक्तों’ के अलावा सामान्य नागरिक उसे गम्भीरता से नहीं लेंगे। प्रधानमंत्री…

बुन्देलखण्ड में कोविड से पलायन

सूखे और अकाल के चलते बडी संख्‍या में पलायन बुंदेलखंड की नियति बन गई है। कोरोना महामारी ने इसे और भी बढा दिया है। क्या हैं, वहां के हालात? अपने लेख के लिए शिवाशीष ने ‘सेंटर फॉर फाईनेन्शियल एकॉउन्टेबिलिटी’ (सीएफए)…