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गो रूर्बन यात्रा में अहिंसक स्थानीय अर्थव्यवस्था समझने निकले है देश के चुनिंदा युवा

18 से 25 नवंबर तक घूमेगी गो रूर्बन यात्रा इटारसी से कटनी तक  

भोपाल, 18 नवंबर। कोरोना वायरस ने देश की गति को भी थोड़े समय के लिए धीमा कर दिया,  इसका बड़ा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। मुट्ठी भर लोगों को हिंसक अर्थव्यवस्था से लाभ मिलता है, अगर हम चाहते हैं कि सारी मानवता का भला हो, तो हमें पूरी तरह से एक अहिंसक अर्थव्यवस्था को अपनाना होगा। यह समझने के लिए अहिंसक स्थानीय अर्थव्यवस्था क्या है और इसके उदाहरणों को देखने/समझने के लिए गो रुर्बन यात्रा और शिबिर का आयोजन 18 से 25 नवंबर 2020 तक किया गया हैं।

गो रूर्बन एकता परिषद और अंश हैप्पीनेस सोसाइटी द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्राम और शहर की बढ़ती दूरियों को कम करना और आपसी समझ बनाना है। गो रूर्बन द्वारा इससे पूर्व 7 शिविरों का आयोजन किया गया हैं।

गो रुर्बन यात्रा आज सुबह इटारसी के ग्राम पथरोटा स्थित भारत कालिंग सेंटर से शुरू हुई। यह 8 दिवसीय यात्रा 25 नवंबर को कटनी के ग्राम बिजौरी में मानव जीवन विकास समिति पहुंचेगी। वहां 25 से 28 नवंबर तक मानव जीवन विकास समिति परिसर में एक शिबिर आयोजित किया गया है।

गो रुर्बन यात्रा में फिलहाल 18  युवा प्रतिभागी शामिल हुए है, जिन्हें एक प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया है। कटनी में आयोजित होने वाले शिविर में 20 अन्‍य युवा प्रतिभागी भी सम्मिलित होंगे। यात्रा में मध्य प्रदेश के अलावा देश के लगभग 8 राज्यों के प्रतिभागी, जिनमें दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र शामिल हैं।

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टाटा इंस्‍टीटयूट आफॅ सोशल साइंसेस (TISS)  के सामाजिक कार्य में मास्टर्स कर रहे कैंप के प्रतिभागी आनंद जैसवाल ने कहा  कि उनके लिए इस तरह का यह पहला अनुभव है और यह यात्रा अहिंसक अर्थव्यवस्था और समाज के अलग अलग विषयों पर समझ बेहतर करने में मदद करेगी।

आज यात्रा उद्घाटन सत्र भारत कालिंग, पथरौटा गाँव, इटारसी में

गो रूर्बन यात्रा की शुरुवात सुबह की प्रार्थना और जय जगत गीत गाकर हुई। प्रार्थना के बाद सभी को 3 समूहों में बांट कर फील्ड विजिट पर भेजा गया। गो रूर्बन यात्रा के यात्रियों को अहिंसक स्थानीय अर्थव्यवस्था को समझने के उद्देश्य से समूह में विभाजित कर उन्‍होंने अलग अलग क्षेत्रों में भेजा गया । एक समूह को एक रेस्टोरेंट मालिक से मिलने भेजा गया, जो पिछले 8-9 सालों से खेती किसानी कर रहे थे और अभी कुछ समय पहले ही रेस्टोरेंट शुरू किया है।  दूसरे समूह को एक युवा किसान के पास भेजा, जो फूलों की खेती करते हैं और तीसरे समूह को एक परिवार के पास भेजा जो अपनी आजीविका के लिए भंगार इकट्टा करते हैं। इन विजिट से वापस आने के बाद सभी युवाओं अपने अपने अनुभव साझा किए।

गो रूर्बन यात्रा के उद्घाटन सत्र का आयोजन भारत कॉलिंग में किया गया जिसमें मुख्य रूप से सिस्टर सिल्विया पीटर, प्रज्ञान स्कूल के संचालक दर्शन तिवारी, एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अनीश कुमार, फिल्ममेकर आर वरुण, ईको क्रैडल की संचालक सौम्या जैन, अनंत मंडी से आरती रैगर और भारत कालिंग के संचालक संदीप महतो उपस्थित रहे।

एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अनीश कुमार ने इस यात्रा के महत्व के बारे में अवगत कराया। सिस्टर सिल्विया ने प्रेम और सद्भावना का संदेश देते हुए मानव और  प्रकृति के संबंध को बड़ी सहजता से समझाया।

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उद्घाटन सत्र के बाद प्रतिभागी गांधी ग्राम, छेड़का की और रवाना हुए। 3 घंटे का सफर तय करके यात्रा गांधी ग्राम पहुँची, जहां उसका स्वागत ग्रामवासियों द्वारा किया गया। यात्री आज रात गांधी ग्राम में ही रुकेंगे और कल सुबह सलकनपुर के पास भिलाई गाँव की ओर प्रस्थान करेंगे।

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