वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

विश्‍व वानिकी दिवस : जंगल की जरूरत

21 मार्च विश्‍व वानिकी दिवस जलवायु के जानकारों ने बताया कि कार्बन सोखने में जंगलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। विश्व के जंगल कुल कार्बन उत्सर्जन का 30 प्रतिशत अवशोषण कर लेते हैं। ‘इंटरनेशनल पेनल आन क्लायमेट चेंज’ (आयपीसीसी)…

शोध अध्‍ययन : राष्ट्रीय पक्षी बाल्ड ईगल में सीसा विषाक्तता

गैर-मुनाफा संगठन कंज़रवेशन साइंस ग्लोबल के जीव विज्ञानी विन्सेंट स्लेब और उनके सहयोगियों ने 8 वर्षों तक 1210 बाल्ड और गोल्डन ईगल के ऊतक एकत्रित किए। लगभग 64 प्रतिशत बाल्ड ईगल और 47 प्रतिशत गोल्डन ईगल में दीर्घकालिक सीसा विषाक्तता…

क्‍या हम बचा पाएंगे अपने जंगल ?

वनों के महत्व को समझने-समझाने में हम लगातार चूक कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यही है कि हम लगातार वनों को खोते जा रहे हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण चाहे कितना भी दावा कर लें, पर वनों का प्रतिशत…

पांच राज्यों में चुनाव : खारिज होता पर्यावरण

पांच राज्यों की विधानसभाओं के आसन्न चुनावों में हमेशा की तरह वे सभी धतकरम किए जा रहे हैं जिन्हें हमारे मौजूदा तर्ज के लोकतंत्र ने आत्मसात कर लिया है, लेकिन क्या इस धमा-चौकडी में हमारे जीवन के लिए जरूरी पर्यावरणीय…

खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है क्षेत्र आधारित कठोर जैव विविधता संरक्षण

शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पाया कि संरक्षण के लिए दुनिया भर की भूमि क्षेत्र की सख्ती से रक्षा करने से दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। क्षेत्र…

हीरा खोदकर हारे पन्ना-वासी

पिछले दिनों छतरपुर जिले के बक्सवाहा इलाके में हीरा उत्खनन को लेकर भारी बवाल मचा था। कई पर्यावरणविदों ने पानी के लिए तरसते बुंदेलखंड में जंगल कटाई का विरोध किया था तो अनेक स्थानीय लोगों ने रोजगार के लिए इस…

प्रकृति : समुद्री सम्पदा की समाप्ति में लगी जेलीफिश

प्रकृति के साथ इंसानी रिश्तों की बदहाली आए दिन हमें भीषण प्राकृतिक आपदाओं के रूप में भोगना पडती हैं, लेकिन इंसान इसे कभी सुधारने की कोशिश नहीं करता। करोडों साल के इतिहास में प्रकृति खुद अपने को बार-बार समाप्त और…

130 ‘पर्यावरण सांसदों’ की राय में पर्यावरण और बुंदेलखंड के मसले को लेकर गंभीर नहीं हैं सरकारें

12 घंटे चली पर्यावरण संसद में केन बेतवा लिंक, बकस्वाहा जंगल, शैल चित्र से संबंधित प्रस्ताव पारित किये भोपाल।  बकस्वाहा जंगल और केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें पर्यावरण और बुंदेलखंड के प्रति गंभीर नहीं हैं।…

महाकुम्भ की तरह हर 12 वर्ष में आता है नीलकुरूंजी का दुर्लभ फूल

पेड़-पौधों में रूचि रखने वालों वनस्पति शास्त्र के शिक्षक व विद्यार्थी तथा प्रकृति सौदर्यं को निहारने वालों के लिए नीलकुरूंजी का फूलता फूल किसी महाकुम्भ से कम नहीं है। पर्यटकों को इन फूलों की खूबसूरती को देखने के लिए 12…

अभयारण्य से भयभीत गांव

अपने आकार के करीब एक चौथाई इलाके में जंगल वाले मध्यप्रदेश में नए अभयारण्यों का प्रस्ताव आया है। ऐसे में उन लोगों को क्या होगा जो इन जंगलों को अपना माई-बाप मानकर उन पर निर्भर जीवन जीते और एन उसके…