राजनीति

Pension scheme बेमानी हैं, दोनों तरह की पेंशन योजनाएं

पिछले कुछ दिनों से देश भर में पेंशन को लेकर भारी मारामारी मची है। हिमाचलप्रदेश जैसे राज्यों में तो यह मसला चुनाव हराने-जिताने की गारंटी तक हो गया था। क्या है, इसके पीछे की कहानी? और क्या पेंशन की मौजूदा…

Rahul Gandhi राहुल बेघरबार किए जाने वाले हैं ! अब जेल को ही घर बनाएंगे ?

‘मोदी’ सरनेम को लेकर दायर किए गए मानहानि के मुक़दमे के एक रुके हुए फ़ैसले ने चौबीस घंटों के भीतर ही एक सौ चालीस करोड़ लोगों के देश की राजनीति को आगे आने वाले सालों के लिए हिलाकर रख दिया।…

लोकतंत्र की अस्मिता का सवाल : दो तारीखें-1930 और 2023

लगभग सौ साल पहले महात्मा गांधी ने ‘नमक सत्याग्रह’ के दौरान लोकतंत्र की जो उद्घोषणा की थी, आज राहुल गांधी को दी गई सजा और उसके निहितार्थों ने उसकी याद दिला दी है। आखिर राहुल गांधी का दोष क्या है?…

लोकतंत्र : सत्ता का चहेता ‘चुनाव आयोग’

केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टियों की मनमर्जी से मनचीते चुनाव आयुक्तों की बहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से रोक लगने की संभावना है,लेकिन क्या यह मौजूदा राजनीतिक जमातों के चलते संभव होगा? क्या बेलगाम लोकतांत्रिक…

क्‍या है ‘इलेक्शन बांड’ के खतरे

जगदीप एस. छोकर हाल के वर्षों में चुनाव, खासकर संसद और विधानसभाओं के चुनाव भारी-भरकम पूंजी की दम पर लडे जाने लगे हैं। यह पूंजी ‘इलेक्शन बांड’ की मार्फत राजनीतिक दलों तक पहुंचती है। अलबत्ता, ‘भारतीय स्टेट बैंक’ से बेचे…

यात्रा ने राहुल को चतुर और कांग्रेस को भय-मुक्त बना दिया !

देश-हित में राहुल की यात्रा का योगदान यह माना जा सकता है कि नागरिक सत्तारूढ़ दल और उसके आनुषंगिक संगठनों के उग्रवादी कार्यकर्ताओं से कम डरने लगेंगे। गौर किया जा सकता है कि सांप्रदायिक विद्वेष की घटनाओं में कमी दिखाई…

भारत जोड़ो यात्रा : राहुल गांधी सरकार के ख़िलाफ़ जन-आंदोलन खड़ा करेंगे ?

इस बात से संदेह दूर हो जाना चाहिए कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के ज़रिए राहुल ने 137-वर्षीय पुरानी कांग्रेस को अब अपने अस्तित्व के लिए पूरी तरह से अपने ऊपर निर्भर कर दिया है। वे कांग्रेस के नरेन्द्र मोदी बन…

खेती-किसानी छोड़ आंदोलन की तैयारी में भाजपा के किसान

पिछले साल राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर सालभर से ज्यादा धरना-रत रहे किसानों ने सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में अब एक फिर आंदोलन का मन बनाया है। इसमें सत्तारूढ़ ‘भाजपा’ से जुडे ‘भारतीय किसान संघ’ ने अगुआई का तय…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : भगवा-भय और तिरंगी यादें

अगस्त 1942 से अगस्त 1947 के बीच का करीब पांच साल का दौर हमारे इतिहास का बेहद अहम हिस्सा रहा है। नौ अगस्त 1942 को ‘भारत छोडो’ आंदोलन से लेकर 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक भारत समेत दुनियाभर…

हर घर तिरंगा : तिरंगी कहानी

चीन के माओ-त्से-तुंग कुछ-कुछ अंतराल से अपनी विशाल आबादी को व्यस्त रखने की खातिर कोई-न-कोई मुहीम छेडते रहते थे और जनता उसमें पूरे मनोयोग से लग जाती थी। उनकी यह कारगर शासन-पद्धति थी। हमारे यहां भी कुछ ऐसा ही दौर…