ताजा आलेख

इंदौर : स्वच्छता के तमगे और दूषित पानी की सच्चाई 

इंदौर को वर्षों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिलता रहा है, लेकिन दूषित पेयजल से हुई 14 मौतों ने इस छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा बताता है कि स्वच्छता के दावों के…

वर्ष 2026 : नए वर्ष में उम्मीद का एक दिया जलाएं

वर्ष 2025 के अंत और 2026 के आरंभ के साथ दुनिया एक गहरे संकट के दौर से गुजर रही है। बढ़ती असमानताएँ, गंभीर होता पर्यावरण संकट, निशस्त्रीकरण में पीछे हटना और एआई–आधारित हथियारों का प्रसार मानवता के सामने नई चुनौतियाँ…

‘स्मार्ट सिटी’ में डाटा : निजीकरण से कमाई

आजकल डाटा पूंजी के नए रूप की तरह उभरा है। मोबाइल का सामान्य उपयोग हमारे जीवन की जानकारियों, यानि डाटा को सार्वजनिक कर सकता है जिसे बाद में तरह-तरह के बाजारों में बेचा जा सकता है। एक दशक पहले देश…

लेबर कोड 2025 : श्रमिक गरिमा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक मोड़

लेबर कोड 2025 केवल कानून में बदलाव नहीं, बल्कि भारत के श्रम परिदृश्य में संरचनात्मक सुधार की शुरुआत है। न्यूनतम वेतन की एकरूपता, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों के लिए नई गारंटियाँ—इन सबके बावजूद असली…

लद्दाख : भूख हड़ताल से सुलगते विरोध तक

लद्दाख में पाँच वर्षों से अधूरी पड़ी माँगों ने अब चिंता और असंतोष को नया मोड़ दे दिया है। शांतिपूर्ण तरीक़े से शुरू हुआ आंदोलन हाल ही में उग्रता की ओर बढ़ा, जहाँ युवाओं की बेचैनी साफ़ दिखाई दी। यह…

पत्रकारिता में पहुंच बनाती ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’

हाल में एलॉन मस्क की ‘ग्रोक एआई’ की ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ उर्फ ‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ ने दुनियाभर में बवाल खड़ा कर दिया है। कोई भी ‘ग्रोक’ से किसी भी तरह का सवाल करके जवाब प्राप्त कर लेता है, लेकिन क्या ये जवाब…

जंगल बढ़ेगा तो देश भी बढ़ेगा – तुलसी गौड़ा

पिछले यानी 16 दिसम्बर देश की दो हस्तियां हमसे अलविदा हो गयी एक तो प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन तथा दूसरों जंगलों का विश्वकोष कहीं जाने वाली तुलसी गौड़ा। तुलसी गौड़ा का नाम ही हिन्दुओं के पवित्र एवं पूजनीय…

वित्‍तीय संसार : सेठ की साथी सरकार

अमेरिका के ‘फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ (एफबीआई) द्वारा अडाणी पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने अव्वल तो सरकार और सेठ के सर्वज्ञात निकट संबंधों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। दूसरा और सर्वाधिक शर्मनाक खुलासा देश की…

खेती : संकट में सोयाबीन

रोजमर्रा के भोजन में आमतौर पर कम हैसियत रखने वाली बाजार-हितैषी सोयाबीन के किसानों पर आजकल भारी संकट तारी है। लागत, मेहनत और परिवहन-भंडारण की उन्हें इतनी कम कीमत मिल रही है कि वे दूसरी कतिपय फसलों की तरह सोयाबीन…

वायनाड त्रासदी : पानी की भी याददाश्त होती है !

मारिया टेरेसा राजू पिछले महीने केरल के वायनाड जिले में हुई भीषण त्रासदी के लिए वैज्ञानिकों ने विकास के मौजूदा मॉडल को जिम्मेदार ठहराया है। ‘पश्चिमी घाट’ को लेकर गहन अध्ययन करने वाले प्रोफेसर माधव गाडगिल ने भी कहा है…