केरल का वायनाड हो या उत्तराखंड का जोशीमठ, सभी ने पिछले कुछ सालों में भीषण त्रासदियों को भुगता है। विडंबना यह है कि ये त्रासदियां विकास-के-अंधे राजनेताओं, नीति-निर्माताओं और बिल्डर-ठेकेदारों के कॉकस की पहल पर बाकायदा जानते-बूझते रची जा रही…
फिलिस्तीन के साथ जारी घमासान में इजरायल पानी सरीखी बुनियादी जरूरत हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है और इसमें इजरायल की सरकारी कंपनी ‘मेकोरोट’ ने मार्चा संभाला है। क्या यह किसी भी तरह से स्वीकार्य होना चाहिए? इजरायल की…
हिमालय और उसके राज्यों की मौजूदा आपदाएं आत्महंता विकास के विकराल नमूने बनते जा रहे हैं। इंसान अपना अंत किस नासमझी से जानबूझकर रचता है इसे देखना-समझना हो तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों की मौजूदा हालातों का जायजा लिया…
गंगा की अविरलता को बरकरार रखने के लिए 111 दिन के अपने उपवास के बाद प्राण त्यागने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ऐसे बिरले लोगों में हैं जिन्होंने गंगा को जीवित रखने के लिए विज्ञान और आध्यात्म…
दिल्ली में नकली केदारनाथ धाम खड़ा करने के मंसूबे बांधने वाले हमारे समाज को ग्यारह साल पहले उत्तराखंड के असली केदारनाथ धाम में हुई भीषण त्रासदी कितनी याद है? क्या तीर्थाटन को मौज-मस्ती के पर्यटन में तब्दील करते लाखों-लाख कथित…
जनहित बताकर रची जाने वाली सरकारी योजनाएं असल में भ्रष्टाचार, लापरवाही और आम हितग्राहियों की बेशर्म अनदेखी के चलते आमतौर पर नकारा साबित होती हैं। हाल का उदाहरण घर-घर पानी पहुंचाने की खातिर बनाए गए ‘जल जीवन मिशन’ का है…
कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि 2024 का साल ज्ञात इतिहास का सर्वाधिक गरम साल रहा है। ऐसे में इंसानी वजूद के लिए क्या किया जाना चाहिए? विकास की मौजूदा खाऊ-उडाऊ अवधारणा को फौरन से पेश्तर बदल डालने…
मानसून आते ही बादल फटना आजकल आम है। भारी मात्रा में कम समय की ये तेज वर्षा बाढ़, भू-स्खलन और बिजली गिरने की वजह बनती है। विडम्बना यह है कि आसमानी पानी के ये करतब इंसानी कारनामों के नतीजे में…
सेवा सुरभि ने हरियाली , हवा और पानी की सलामती के लिए किया विचार मंथन इंदौर 2 जून। किसी समय इंदौर के एक ही क्षेत्र में 9 लाख पेड़ थे, इसलिए नाम पड़ गया नवलखा। पलासिया, लालबाग, पीपली बाजार, इमली …
मौजूदा आम चुनावों में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ओर से नागरिकों को थोक में तरह-तरह की ग्यारंटी दे रहे हैं, लेकिन किसी का ध्यान जीवन की बुनियादी जरूरत, हवा और पानी की ग्यारंटी की तरफ नहीं है। क्या इन दोनों…