हीरा नहीं, जंगल है सदा के लिए
मध्यम वर्ग ने एक जीवन मंत्र अपना लिया है। खूब कमाओं और खूब खर्च करो। खर्च करने के लिए सोने के बाद अब हीरे का लालच है। और हीरा मिला है बक्सवाहा के जंगलों में। लेकिन इसके लिए लाखों पेड़…
हीरे की हवस में कटते बुंदेलखंड के जंगल
पिछले कुछ सालों से लगातार सूखे की मार झेलते बुंदेलखंड में अब पानी देने वाले जंगलों पर खतरा मंडराने लगा है। यह खतरा समाज के बेहद छोटे, ऊपरी अमीर तबके की हीरे की हवस के रूप में आया है। कहा…
प्रदूषण से पस्त होते मौलिक अधिकार
प्रकृति को ‘प्रसाद’ मानने और उसी लिहाज से उसके ‘फलों’ का उपभोग करने की नैतिक, आध्यात्मिक निष्ठा के अलावा बीसवीं सदी में रचा गया हमारा संविधान भी पर्यावरण को लेकर खासा सचेत है। उसके कई हिस्से जल, जंगल, जमीन, वायु…
कोराना काल में प्राणवायु के लिए पेड़
कोविड-19 महामारी के इस दौर में जिस अदृश्य, अ-स्पर्शनीय, गंधहीन और केवल महसूस की जाने वाली प्राणवायु यानि ऑक्सीजन की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही है, वह अपने आसपास की वनस्पतियों, पेडों में भरपूर मौजूद है। लेकिन क्या…
श्रम की प्रतिष्ठा के लिए काम के बदले अनाज
ग्रामीण बेरोजगारी के संकट के इस दौर में देश के ख्यात सामाजिक संगठन ‘एकता परिषद’ ने एक अभिनव प्रयोग किया है। काम के बदले अनाज की पारम्परिक पद्धति में श्रम की प्रतिष्ठा जोडकर ‘एकता परिषद’ ने ग्रामीणों को अपने इलाके…
मेघालय के पर्यावरण को कोयला खनन से खतरा
उत्तर-पूर्व का राज्य मेघालय एक जमाने में अपनी खूबसूरती और भारी वर्षा के कारण विख्यात था, लेकिन अब, दुनिया के ऐसे ही दूसरे इलाकों की तरह, खनन, जल-विद्युत परियोजनाओं और कथित विकास की चपेट में आकर बर्बाद होता जा रहा…
‘विकास’ की बलि चढ़ता हिमालय
उत्तराखंड की ताजा त्रासदी ने एक बार फिर उस सनातन सवाल को उछाल दिया है कि आखिर विकास के नाम पर होने वाली गतिविधियां हमारे विनाश की वजह क्यों बनती जा रहीं हैं? क्या उत्तराखंड में बनी और बन रहीं…
भारी पड़ेगी , भूजल की अनदेखी
कृषि और औद्योगिक उत्पादन में बढौतरी ने हमारे जल-संसाधनों पर भारी संकट खड़ा कर दिया है। नतीजे में धीरे-धीरे हजारों साल में बना भूगर्भीय जल भंडार सूखता जा रहा है। इससे कैसे निपटा जाए? जब से हमारे देश में कुंओं, बावडियों…
कोविड में कितनी साफ रहीं, गंगा?
आंकडे बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौर में लगे लॉकडाउन में गंगा और यमुना सरीखी उसकी सहायक नदियां निर्मल हो गई थीं। इस भुलावे में रहकर कि महामारी के चलते गंगा साफ हो जायेगी, यह सवाल नागरिकों के जिन्दा…
नर्मदा रेत खनन : जनता के साथ जलवायु का कबाड़ा
इमारतों के निर्माण में रेत यानि सिलिका बहुत अहम भूमिका निभाती है, लेकिन क्या ‘जीडीपी’ में सर्वाधिक योगदान करने वाली इस गतिविधि को आम लोगों और उनके साथ पर्यावरण को उजाडने की छूट दी जा सकती है? इन दिनों मध्यप्रदेश,…









